चारधाम यात्रा का मूल मंत्र होगा ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ : धामी
मानसून को देखते हुए सरकार अलर्ट, रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर रहेगा सख्त प्रतिबंध
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 2 Jun, 2026 06:33 PMदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और बेहतर समन्वय, प्रभावी संवाद तथा सुव्यवस्थित प्रबंधन से यात्रा को अधिक सुरक्षित एवं सफल बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक चारधाम यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही संचालन की अनुमति दी जाए।
क्षमता से अधिक भीड़ होने पर लागू होगी चरणबद्ध व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी धाम अथवा पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होने की स्थिति में नीचे स्थित होल्डिंग एरिया और प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर यात्रियों तथा वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की जाए। उन्होंने भीड़ प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं चरणबद्ध व्यवस्था अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि यात्रियों को नियंत्रित तरीके से आगे भेजा जाए ताकि अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यात्रियों को प्रतीक्षा अवधि, भीड़ नियंत्रण के कारणों और आगे की व्यवस्थाओं की नियमित जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।
सूचना के अभाव का सामना न करें श्रद्धालु
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल और एफएम रेडियो के माध्यम से लगातार अपडेट जारी किए जाएं। मौसम परिवर्तन, मार्ग अवरोध, ट्रैफिक जाम अथवा दर्शन में विलंब जैसी परिस्थितियों की जानकारी समय पर यात्रियों तक पहुंचाई जाए।
मानसून को देखते हुए बढ़ाई जाए सतर्कता
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा का पहला चरण प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन और अन्य विभागों के समन्वित प्रयासों से सफल रहा है, लेकिन अब यात्रा अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून और प्रतिकूल मौसम बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में सभी विभागों को अतिरिक्त सतर्कता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कार्य करना होगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं से प्राप्त शिकायतों, सुझावों और फीडबैक की दैनिक समीक्षा कर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
संवेदनशील स्थानों पर तैनात रहें राहत संसाधन
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और राहत-बचाव उपकरण पहले से उपलब्ध रखे जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में रहकर नियमित निरीक्षण करने और श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने को कहा।
होटल और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित सैंपलिंग और जांच करने को कहा।
स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने चारों धामों और पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा। गंभीर मरीजों के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा के संचालन हेतु राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए।
इसके अलावा केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में शेड स्थापित करने तथा वर्षा और धूप से बचाव के बेहतर प्रबंध करने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को यात्रा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने तथा श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।



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