चंपावत दुष्कर्म प्रकरण में बड़ा खुलासा, पुलिस जांच में सामने आई साजिश की कहानी

तकनीकी और वैज्ञानिक जांच में नामजद आरोपी घटनास्थल पर नहीं मिले, बदले की भावना से रची गई थी कथित साजिश

YUGVARTA NEWS

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Lucknow, 7 May, 2026 07:44 PM
चंपावत दुष्कर्म प्रकरण में बड़ा खुलासा, पुलिस जांच में सामने आई साजिश की कहानी

देहरादून/चंपावत। उत्तराखंड पुलिस ने चंपावत में दर्ज नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण की जांच में बड़ा खुलासा किया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मामला सुनियोजित साजिश की ओर संकेत करता है, जिसमें बदले की भावना से नाबालिग को बहला-फुसलाकर कथित घटनाक्रम रचा गया।


पुलिस के मुताबिक, 6 मई 2026 को वादी द्वारा कोतवाली चंपावत में तहरीर देकर आरोप लगाया गया था कि 5 मई की रात उसकी 16 वर्षीय पुत्री के साथ तीन व्यक्तियों ने दुष्कर्म किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस अधीक्षक चंपावत Rekha Yadav के निर्देश पर क्षेत्राधिकारी चंपावत के पर्यवेक्षण में 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई।


पुलिस अधीक्षक ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा पीड़िता और स्थानीय लोगों से बातचीत कर जानकारी जुटाई। पुलिस टीम ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलित किए और आरएफएसएल की फील्ड यूनिट से मौके का परीक्षण कराया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, सीडब्ल्यूसी के समक्ष काउंसलिंग और न्यायालय में बयान भी दर्ज कराए गए।


विवेचना के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले। जांच में सामने आया कि पीड़िता एक विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने मित्र के साथ गई थी। घटना के दिन उसकी गतिविधियों और विभिन्न स्थानों पर मौजूदगी की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से हुई।


पुलिस के अनुसार, चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट, संघर्ष या जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। वहीं कुछ गवाहों के बयान तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए। जांच में कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच लगातार संपर्क और बातचीत भी सामने आई, जिसे पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेत बताया है।


पुलिस जांच में यह भी पाया गया कि नामजद आरोपी विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत घटना के समय कथित घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से उनकी अनुपस्थिति की पुष्टि हुई है।


पुलिस मुख्यालय के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कमल रावत ने बदले की भावना से प्रेरित होकर नाबालिग को कथित रूप से बहला-फुसलाकर यह पूरा घटनाक्रम रचा। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच अभी जारी है तथा सभी संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है।


पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने कहा कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता और वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न होना पड़े और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।


उत्तराखंड पुलिस ने दोहराया कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति उसकी “जीरो टॉलरेंस” नीति जारी रहेगी। साथ ही झूठी या भ्रामक शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मीडिया और आमजन से अपील की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रसारण और प्रकाशन करें।


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