उत्तराखण्ड में ट्रांसपोर्ट क्रांति की तैयारी: ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं को मिली रफ्तार
धामी सरकार की उत्तराखण्ड में ट्रांसपोर्ट क्रांति की तैयारी, ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं को मिली रफ्तार, प्राथमिकता पर होगा क्रियान्वयन
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 17 Feb, 2026 08:22 PMDehradun : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश की शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड ई-बीआरटीएस की विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें देहरादून और हरिद्वार सहित ऋषिकेश क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं की प्रगति पर गंभीर मंथन हुआ। बैठक में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा सहित निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और विभिन्न परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति का प्रस्तुतीकरण किया। सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे को मिली अहम स्वीकृति
बैठक में जानकारी दी गई कि त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी/अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। निगम द्वारा स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस हेतु आवेदन भी कर दिया गया है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि पर्वतीय यातायात दबाव को कम करने में भी सहायक होगी। सचिव ने 30 वर्ष के कंसेशन पीरियड को भविष्य की परियोजनाओं में बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए, ताकि निजी निवेश आकर्षित किया जा सके और परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत हो।
हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे और पीआरटी सिस्टम
हरिद्वार शहर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना (डीडीयू पार्किंग-चण्डी देवी-मनसा देवी एवं मल्टीमॉडल हब) की डीएफसी कराए जाने हेतु अनुरोध बैठक में किया गया। सचिव ने 18.02.2026 की तिथि डीएफसी प्रक्रिया के लिए निर्धारित करते हुए निर्देश दिया कि परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को पीपीपी सेल से वेटिंग कराया जाए।
हरिद्वार शहर में पीआरटी परियोजना के अंतर्गत चार कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—
- सीतापुर से भारत माता मंदिर
- सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर
- लालतारा चौक से भूपतवाला
- गणेशपुरम से डीएवी पब्लिक स्कूल
इस परियोजना में 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं तथा कुल लंबाई 20.73 किमी होगी। यह योजना विशेष रूप से तीर्थ सीजन के दौरान यातायात प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
देहरादून में ई-बीआरटीएस: 31.52 किमी का मेगा कॉरिडोर
देहरादून शहर में प्रस्तावित ई-बीआरटीएस परियोजना के अंतर्गत दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। प्रथम कॉरिडोर आईएसबीटी से रायपुर तक होगा, जिसमें 35 स्टेशन प्रस्तावित हैं और कुल लंबाई 31.52 किमी होगी। बैठक के उपरांत सचिव ने निगम अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
देहरादून पीआरटी के तीन प्रमुख कॉरिडोर
देहरादून में पीआरटी परियोजना के अंतर्गत तीन कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—
- क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक
- पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन
- गांधी पार्क से आईएसबीटी पार्क
निगम द्वारा इन कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर अनुमोदन के अनुरूप कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया। सचिव ने निर्देश दिया कि परियोजना को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल से जोड़ा जाए, जिससे शहरी विस्तार सुनियोजित ढंग से हो सके।
17 स्टेशन का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण
बैठक के उपरांत सचिव द्वारा निगम अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर (आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन, कुल 17 स्टेशन) का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित आईएसबीटी स्टेशन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि स्टेशन निर्माण हेतु 0.64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। संबंधित भूमि का स्वामित्व मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन है। प्रबंध निदेशक ने परियोजना में शामिल शासकीय भूमि को शीघ्र निगम को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया, ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से प्रारंभ हो सके।
पार्किंग पॉलिसी और समन्वित विकास पर जोर
बैठक में सचिव ने उत्तराखण्ड कार पार्किंग पॉलिसी-2022 का गहन अध्ययन कर भविष्य की सभी शहरी परिवहन परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्रिवेणी-नीलकंठ और हरिद्वार रोपवे परियोजनाएं एडवांस स्टेज में हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र क्रियान्वित किया जाए।
शहरी परिवहन के नए युग की शुरुआत
समीक्षा बैठक से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि उत्तराखण्ड में शहरी परिवहन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की तैयारी है। ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है। इनके धरातल पर उतरने से देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में यातायात प्रबंधन, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
परिवहन नेटवर्क विकसित करने पर फोकस – डॉ. आर. राजेश कुमार
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप उत्तराखण्ड को आधुनिक, सुरक्षित और सतत शहरी परिवहन व्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रोपवे, पीआरटी और ई-बीआरटीएस परियोजनाएं न केवल यातायात दबाव कम करेंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन संवर्धन में भी सहायक होंगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी परियोजनाएं गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ आगे बढ़ाई जाएं।


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