संस्कारों से सशक्त उत्तराखंड: मातृशक्ति को धामी का नमन, संस्कृति से राष्ट्र निर्माण का आह्वान
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 17 Feb, 2026 08:19 PMDehradun : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेल नगर, देहरादून में विश्वमांगल्य सभा के तत्वाधान में आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बचपन और निजी जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उनका जीवन किसी विशेष सुविधा या संसाधनों से नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से बना है। साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने प्रारंभ से ही मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व समझा। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत बना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साधारण जीवन शैली ने उन्हें जमीन से जुड़े रहने की सीख दी। सादगी, संयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना ने उनके विचारों और निर्णयों को आकार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवन में ऊँचा पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। यही मूल्य आज भी उनके हर निर्णय और कार्यशैली का आधार हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर से पधारी माताओं और बहनों के बीच उपस्थित होने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस आयोजन के माध्यम से देश-प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक क्षेत्रों में कार्यरत परिवारों की मातृशक्ति, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली नारीशक्ति तथा प्रदेश की बेटियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन समाज और राष्ट्र के विकास में मातृशक्ति की भूमिका को और अधिक सशक्त एवं व्यवहारिक रूप से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च माना गया है। मातृशक्ति को परिवार की धुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और यदि परिवार सशक्त होगा तो समाज और राष्ट्र भी सशक्त होंगे। उन्होंने विश्वमांगल्य सभा द्वारा मातृशक्ति और पारिवारिक मूल्यों को रेखांकित करने के निरंतर प्रयासों की सराहना की तथा सभी कार्यकर्ताओं और जुड़ी हुई मातृशक्ति के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक परंपराओं, धर्मग्रंथों और ऐतिहासिक घटनाओं में माता द्वारा दिए गए संस्कारों का अद्वितीय महत्व रहा है। उन्होंने प्रभु राम एवं माता कौशल्या, भगवान कृष्ण एवं माता यशोदा तथा छत्रपति शिवाजी महाराज एवं माता जीजाबाई के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों के व्यक्तित्व निर्माण में मातृसंस्कारों की निर्णायक भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि समय के साथ पारिवारिक संरचना में व्यापक परिवर्तन आए हैं। संयुक्त परिवारों का स्वरूप सीमित हुआ है और एकल परिवारों का प्रचलन बढ़ा है, जिससे सामूहिकता और आत्मीयता प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और व्यस्तता के कारण परिवारों के बीच संवाद में कमी आई है। विवाह-विच्छेद की बढ़ती घटनाएं सामाजिक बदलाव का संकेत हैं। उन्होंने आधुनिकता और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए ‘कुटुंब प्रबोधन’ की अवधारणा को समय की मांग बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्जागरण को नई दिशा देते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह वैचारिक संवाद मातृशक्ति को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती गीता धामी ने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन का मूल है और जब सेवा किसी परिवार की परंपरा बन जाती है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज की चेतना को जागृत करता है। उन्होंने सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का अनिवार्य मूल्य बताया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सप्त मातृ शक्ति सम्मान के अंतर्गत 7 विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली श्रीमती ममता राणा, श्रीमती ममता रावत, सुश्री शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, श्रीमती राजरानी अग्रवाल, श्रीमती मन्जू टम्टा व सुश्री कविता मलासी को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी प्रशांत हरतालकर, डॉ वृषाली जोशी, श्रीमती पूजा माधव, श्रीमती अनुराधा यादव, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई महिलाएं, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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