भारत-नेपाल संस्कृत सहयोग को नई दिशा, उत्तराखंड ने वैश्विक अनुसंधान पहल का किया नेतृत्व
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 5 Aug, 2026 11:32 PMनई दिल्ली/देहरादून। संस्कृत के वैश्विक संवर्धन और भारत-नेपाल के बीच शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देने की पहल में उत्तराखंड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा से शिष्टाचार भेंट कर संस्कृत शिक्षा, अनुसंधान और अकादमिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में संस्कृत के बढ़ते वैश्विक महत्व पर जोर देते हुए दोनों देशों के बीच अनुसंधान, विद्वत्ता, शिक्षण पद्धतियों के आदान-प्रदान और संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। उद्देश्य संस्कृत अध्ययन को नई गति देना और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिष्ठा दिलाना है।
नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा ने संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नेपाल की संस्कृत विद्वत्ता और साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है तथा भारत-नेपाल के बीच शैक्षणिक सहयोग से संस्कृत शिक्षा एवं अनुसंधान को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय संस्कृत विद्वानों के मार्गदर्शन और दोनों देशों के साझा प्रयासों से संस्कृत अध्ययन को वैश्विक पहचान और मजबूती मिलेगी।
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने कहा कि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का मानना है कि संस्कृत सीखना अत्यंत सरल है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल युवाओं के बीच संस्कृत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समन्वय पर विशेष बल देते हैं, जिससे संस्कृत के शुद्ध उच्चारण और अध्ययन को अधिक सहज बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संस्कृत साहित्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए अनेक पहल की गई हैं। राज्य के सभी 13 जनपदों में 13 संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। आगामी 28 अगस्त 2026 को संस्कृत दिवस के अवसर पर संस्कृत ग्रामों, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् तथा विभिन्न गुरुकुलों में संगोष्ठियों, व्याख्यानों, कार्यशालाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जाएगा, ताकि आधुनिक समाज में संस्कृत की प्रासंगिकता को व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सके।
बैठक में जून 2025 में नेपाल में आयोजित 19वें विश्व संस्कृत सम्मेलन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें विश्वभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा दी थी। दीपक कुमार ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) संयुक्त अनुसंधान, शिक्षक एवं छात्र आदान-प्रदान तथा संस्कृत अध्ययन के विस्तार के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का संबंध संस्कृत, सनातन परंपराओं, दर्शन, साहित्य और साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक गहरा सभ्यतागत संबंध है। सदियों से संस्कृत दोनों देशों के बीच बौद्धिक और आध्यात्मिक सेतु का कार्य करती रही है।
बैठक में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य एवं वरिष्ठ संस्कृत पत्रकार डॉ. सुनील जोशी भी उपस्थित रहे। इस दौरान दोनों देशों के युवा शोधार्थियों और विद्वानों को संयुक्त शोध परियोजनाओं, अकादमिक आदान-प्रदान और संयुक्त प्रकाशनों के लिए प्रोत्साहित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई, ताकि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।



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