उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती, सेना और यूएसडीएमए ने बनाई संयुक्त रणनीति
गोल्डन ऑवर में त्वरित राहत, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पूर्व सैनिकों की भागीदारी पर बनी सहमति
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 29 Jul, 2026 07:08 PMदेहरादून, 29 जुलाई। उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी, त्वरित और समन्वित बनाने के लिए भारतीय सेना और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। इसी उद्देश्य से बुधवार को उत्तराखंड सब एरिया में सेना और यूएसडीएमए के वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें मानसून सहित विभिन्न आपदा परिस्थितियों से निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार की गई।
बैठक में उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग, आपसी समन्वय को मजबूत करने और आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
सेना हमेशा रही है राज्य की भरोसेमंद सहयोगी: विनोद कुमार सुमन
बैठक को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा संभावित राज्य में भारतीय सेना हमेशा एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में जब भी बड़ी प्राकृतिक आपदा आई है, सेना ने संवेदनशीलता, तत्परता और पेशेवर दक्षता के साथ राहत एवं बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने वर्ष 2024 में केदारघाटी में आई आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सेना और भारतीय वायुसेना ने हजारों तीर्थयात्रियों तथा स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का उल्लेखनीय कार्य किया। वहीं वर्ष 2025 में धराली सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी सेना ने राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आवश्यक मशीनरी और संसाधनों को दुर्गम इलाकों तक पहुंचाने तथा प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी में अहम भूमिका निभाई।
सचिव ने कहा कि राज्य सरकार और यूएसडीएमए सेना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और आपदा प्रबंधन से जुड़े हर विषय पर सेना को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
‘गोल्डन ऑवर’ में कार्रवाई से बचाई जा सकती हैं अधिक जानें
उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने कहा कि आपदा के समय भारतीय सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता मानव जीवन की रक्षा करना होती है। उन्होंने कहा कि सेना किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए हमेशा तैयार रहती है और यूएसडीएमए के साथ समन्वय लगातार मजबूत किया जा रहा है।
ब्रिगेडियर थापा ने कहा कि सेना का प्रयास रहता है कि आपदा के ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान ही राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया जाए, क्योंकि शुरुआती समय में की गई त्वरित कार्रवाई से अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है।
आईडीआरएन पोर्टल पर संसाधनों की जानकारी साझा करने का सुझाव
बैठक के दौरान सचिव विनोद कुमार सुमन ने सेना से अनुरोध किया कि राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोग होने वाले उपकरणों, मशीनरी और अन्य संसाधनों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। इससे आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न एजेंसियां इन संसाधनों का शीघ्र और प्रभावी उपयोग कर सकेंगी।
इसके अलावा विभिन्न जिलों में गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की भागीदारी बढ़ाने और पूर्व सैनिकों के अनुभव एवं विशेषज्ञता का उपयोग राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में यूएसडीएमए के एसीईओ (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, एसीईओ (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित प्राधिकरण के विशेषज्ञ और सेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
— आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता



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