उत्तराखंड जल्द बनेगा ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य, आगामी कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव: डॉ. धन सिंह रावत
98 प्रतिशत से अधिक साक्षरता दर का दावा, केंद्र सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 17 Jun, 2026 07:33 PMदेहरादून। उत्तराखंड जल्द ही देश के पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है। प्रदेश सरकार आगामी कैबिनेट बैठक में राज्य को ‘पूर्ण साक्षर’ घोषित करने संबंधी प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव शीघ्र शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने के करीब पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य ने केंद्र सरकार के उल्लास (Understanding Lifelong Learning for All in Society - ULLAS) कार्यक्रम के तहत निर्धारित साक्षरता मानकों को पूरा कर लिया है और वर्तमान में प्रदेश की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक है।
उन्होंने कहा कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस विषय पर प्रस्ताव रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसे भारत सरकार को भेजा जाएगा, जिसके बाद उत्तराखंड को औपचारिक रूप से ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का दर्जा मिल सकता है।
वयस्क शिक्षा पर रहा विशेष फोकस
डॉ. रावत ने बताया कि उल्लास कार्यक्रम के तहत राज्य में वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत बुनियादी साक्षरता, जीवनोपयोगी कौशल, व्यावसायिक प्रशिक्षण, बुनियादी शिक्षा और सतत शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
विद्यालयी शिक्षा विभाग ने सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से विभिन्न गांवों को गोद लेकर निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाने का कार्य किया। अभियान में विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी गई। साथ ही उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी।
पांच राज्यों को मिल चुका है दर्जा
शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब तक देश के पांच राज्य—मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम—पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। उत्तराखंड इस सूची में शामिल होने वाला छठा राज्य बन सकता है।
क्या होता है ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य?
केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत किसी राज्य को ‘पूर्ण साक्षर’ तब माना जाता है, जब 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों में साक्षरता दर लगभग 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो और गैर-साक्षर आबादी तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावी रूप से पूरा कर लिया गया हो।
इस मानक के तहत केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल, बुनियादी शिक्षा और सतत सीखने की क्षमता को भी महत्व दिया जाता है।
यदि कैबिनेट और केंद्र सरकार से मंजूरी मिलती है तो उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज करेगा।



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