उत्तराखंड : मानसून आपदाओं से निपटने को उत्तराखंड करेगा मजबूत तैयारी, क्षमता निर्माण पर जोर
दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न, पूर्व चेतावनी प्रणाली से लेकर राहत प्रबंधन तक विशेषज्ञों ने साझा किया रोडमैप
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 12 Jun, 2026 10:15 PMदेहरादून। उत्तराखण्ड आपदा प्रबंधन विभाग की सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रूहेला ने कहा कि मानसून जनित आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए मजबूत तैयारी, प्रशिक्षित मानव संसाधन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक प्रभावी तथा सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
शुक्रवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), गृह मंत्रालय भारत सरकार और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मानसून पूर्व तैयारियों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए विनय रूहेला ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों को भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, शहरी बाढ़ और अन्य मानसून जनित आपदाओं से निपटने के लिए नई तकनीकों, बेहतर समन्वय तंत्र और प्रभावी प्रतिक्रिया प्रणाली की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है।
कार्यक्रम में एनआईडीएम के प्रोफेसर नवनीत कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण आपदाओं का स्वरूप लगातार जटिल होता जा रहा है और भविष्य में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीकों और संस्थागत तैयारियों को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्बन ट्रेडिंग को लेकर उत्तराखण्ड द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों को आपदा प्रभावित लोगों को दिए जाने वाले साइको-सोशल सपोर्ट, राहत प्रबंधन और समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी गई। इसके साथ ही विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर आधारित टेबल-टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने काल्पनिक आपदा परिस्थितियों में विभागवार प्रतिक्रिया, संसाधन प्रबंधन, समन्वय और निर्णय प्रक्रिया का व्यवहारिक अभ्यास किया।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में मानसून जनित जोखिमों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। तकनीकी सत्रों में भूस्खलन जोखिम मूल्यांकन, आपदा प्रबंधन चक्र, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियां और आपदा प्रबंधन में उभरती तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे आधुनिक उपकरण आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, त्वरित और सटीक बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही पूर्व चेतावनी प्रणाली, अंतिम व्यक्ति तक समय पर सूचना पहुंचाने की रणनीति और इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) में अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने कहा कि यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक साबित हुआ। इससे मानसून पूर्व तैयारियों, जोखिम मूल्यांकन, स्वास्थ्य क्षेत्र की तैयारी, सामुदायिक सहभागिता, बहु-विभागीय समन्वय, क्षति आकलन और प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक समझ विकसित हुई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहत शिविर प्रबंधन और राहत सामग्री वितरण पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। प्रतिभागियों को राहत शिविरों में आवास, भोजन, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं और संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं के प्रबंधन की जानकारी दी गई। साथ ही आपदा प्रभावित परिवारों को वितरित की जाने वाली राहत सामग्री किट की संरचना और वितरण प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में डीआईजी होमगार्ड राजीव बलूनी, डीआईजी एसएसबी दुर्गा बहादुर सोनार, सीआरपीएफ के आनंद सिंह, वैज्ञानिक डॉ. हरिशंकर, डॉ. बिमलेश जोशी, एसके राणा, मोहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी और एनआईडीएम के सहायक प्रोफेसर रोहित कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ उपस्थित रहे।



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