खेत बचाओ अभियान’ को जनांदोलन बनाने का आह्वान, अल्मोड़ा में किसानों से बोले मुख्यमंत्री धामी

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध, अल्मोड़ा में 6 करोड़ रुपये की तारबाड़ योजना की घोषणा

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Lucknow, 6 Jun, 2026 10:54 PM
खेत बचाओ अभियान’ को जनांदोलन बनाने का आह्वान, अल्मोड़ा में किसानों से बोले मुख्यमंत्री धामी

अल्मोड़ा, 6 जून। जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच कृषि और किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शनिवार को हवालबाग में राज्य स्तरीय ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भाग लिया तथा कृषि संरक्षण, मिट्टी संवर्धन और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक जनांदोलन बन चुका है। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की शक्ति और आत्मनिर्भरता के आधार हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मिट्टी को मां के समान सम्मान दिया गया है। इसलिए उसकी उर्वरा शक्ति को बनाए रखना और खेती को यथासंभव रासायनिक प्रदूषण से मुक्त रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित कृषि व्यवस्था सौंपना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने किसानों से नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराने, जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप खेती करने का आग्रह किया। साथ ही बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए फसलों के चयन में भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए जल, जंगल, जमीन और प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे लोगों से प्रेरणा लेने की बात कही।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। बागवानी, पॉलीहाउस, फलोत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क और सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही मांडुआ, झंगोरा, चौलाई जैसे मोटे अनाजों के उत्पादन और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ सीधे डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो चुकी है। उन्होंने बताया कि किसानों की आय में वृद्धि के लिए राज्य बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के मामले में उत्तराखंड का देश में अग्रणी राज्यों में शामिल होना सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद में तारबाड़ योजना के तहत लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराए जाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि इससे जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और किसानों को राहत मिलेगी।


कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने संबोधन में किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है तथा अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ड्रैगन फ्रूट, कीवी और मिलेट जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नीतियां बनाई गई हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।


जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है और किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।


कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, मोहन सिंह मेहरा, महेश जीना, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा, गंगा बिष्ट, गोविंद पिलख्वाल, मेयर अजय वर्मा, कृषि सचिव सुरेंद्र नारायण पांडे, कृषि निदेशक, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और किसान उपस्थित रहे।


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