पलायन रोकने को धामी सरकार का बड़ा कदम, पर्वतीय क्षेत्रों में लागू होगी नई चकबंदी नीति
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 13 May, 2026 08:42 PMदेहरादून। उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि विकास को बढ़ावा देने और पलायन की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में “उत्तराखण्ड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” को मंजूरी दे दी गई है।
सरकार का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी हुई कृषि जोतों के कारण खेती लाभकारी नहीं बन पा रही है। नई नीति के तहत बिखरी भूमि को एकीकृत कर कृषि, बागवानी और सह कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ पलायन पर भी रोक लगेगी।
5 वर्षों में 275 गांवों को चकबंदी से जोड़ने का लक्ष्य
नई नीति के तहत प्रदेश के 11 पर्वतीय जिलों में प्रतिवर्ष प्रत्येक जिले के 5 गांवों में चकबंदी कार्य पूरा किया जाएगा। इस प्रकार आगामी 5 वर्षों में कुल 275 गांवों को स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
विवाद रहित गांवों को मिलेगी प्राथमिकता
चकबंदी के लिए उन्हीं गांवों का चयन किया जाएगा जो पूरी तरह भू-विवाद मुक्त हों। इसके साथ ही चयनित क्षेत्र का न्यूनतम भूमि क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर होना जरूरी होगा। यदि क्षेत्रफल इससे कम है तो कम से कम 25 खाताधारकों की लिखित सहमति आवश्यक होगी।
आपसी सहमति से बनेगा चक
इस नीति के तहत काश्तकार आपसी सहमति से चक निर्माण करेंगे। किसान स्वयं चकबंदी योजना तैयार कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। योजना पूरी होने के बाद किसानों को विशेष प्रोत्साहन राशि और अन्य लाभ दिए जाएंगे।
आवेदन की प्रक्रिया भी तय
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान एवं खाताधारक बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) या सहायक कलेक्टर (परगनाधिकारी) के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।
निगरानी के लिए बनेगी हाई पावर कमेटी
नीति के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए राज्य स्तर पर उच्चाधिकार समिति (HPC), राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति और जिला स्तरीय क्रियान्वयन समितियों का गठन किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नीति के लागू होने के तीन वर्ष बाद इसके अनुभवों और सुझावों के आधार पर समीक्षा कर आवश्यक संशोधन भी किए जाएंगे।
राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखंड का अधिकांश भूभाग पर्वतीय और सीमांत क्षेत्र में आता है, जहां वन संपदा और वन्यजीव क्षेत्र अधिक होने के कारण कृषि योग्य भूमि सीमित है। ऐसे में यह नीति राज्य में कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।



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