मानसून से पहले हर विभाग अलर्ट मोड में रहे, आपदा पर तत्काल हो रिस्पांस: मदन कौशिक

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Lucknow, 11 May, 2026 08:31 PM
मानसून से पहले हर विभाग अलर्ट मोड में रहे, आपदा पर तत्काल हो रिस्पांस: मदन कौशिक

देहरादून, 11 मई 2026। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने आगामी मानसून सीजन को देखते हुए सभी विभागों को 24×7 अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में तत्काल रिस्पांस सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में सभी जनपदों एवं रेखीय विभागों द्वारा मानसून अवधि में संभावित आपदाओं और आपात स्थितियों से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा की गई। मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड में मानसून का समय अत्यंत संवेदनशील होता है, क्योंकि इसी दौरान चारधाम यात्रा भी अपने चरम पर रहती है। ऐसे में जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों को पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी आपदा की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचें और बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किए जाएं। मंत्री ने कहा कि रिस्पांस टाइम आपदा प्रबंधन का सबसे अहम हिस्सा है, इसलिए सभी विभाग अपने रिस्पांस मैकेनिज्म को और अधिक प्रभावी और त्वरित बनाएं।

नालों-नालियों की सफाई के लिए विशेष अभियान

मंत्री ने प्रदेशभर में नालों और नालियों की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले कम से कम दो बार नालों और नालियों की सफाई हर हाल में सुनिश्चित की जाए, ताकि जलभराव और शहरी बाढ़ जैसी स्थितियों को रोका जा सके।

उन्होंने कहा कि संभावित बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए हाई कैपेसिटी पम्प, मोटर बोट, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू उपकरण और संचार संसाधन पूरी तरह कार्यशील स्थिति में उपलब्ध रहें। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यकता अनुसार टीमों की पूर्व तैनाती की जाए।

स्वास्थ्य सेवाएं और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष तैयारी

मदन कौशिक ने चारधाम यात्रा मार्गों और आपदा संभावित क्षेत्रों में मेडिकल पोस्ट स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वहां पर्याप्त चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मंत्री ने मानसून के दौरान जलजनित एवं संक्रामक रोगों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को विशेष तैयारी रखने को कहा। साथ ही प्रसव संभावित गर्भवती महिलाओं का पूर्व डेटा संकलित कर उनके लिए स्वास्थ्य केंद्रों का चिन्हीकरण करने के निर्देश भी दिए, ताकि आपदा अथवा मार्ग बाधित होने की स्थिति में भी समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

पशुओं के लिए बने विशेष क्यूआरटी

बैठक में पशुपालन विभाग को निर्देश दिए गए कि आपदा की स्थिति में पशुओं के उपचार और बचाव के लिए विशेष क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) गठित की जाएं। मंत्री ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं।

ट्रेकर्स की सुरक्षा के लिए बनेगी एसओपी

मंत्री ने राज्य में बढ़ती ट्रेकिंग गतिविधियों को देखते हुए ट्रेकिंग पॉलिसी तैयार करने और ट्रेकर्स की सुरक्षा के लिए विस्तृत एसओपी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ट्रेकिंग पर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पूरा विवरण संबंधित एजेंसियों और यूएसडीएमए के पास उपलब्ध होना चाहिए। ट्रेकर्स के पास जीपीएस, संचार उपकरण और अन्य सुरक्षा संसाधन भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनकी लोकेशन ट्रैक कर तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।

मानसून से पहले नदियों का चैनलाइजेशन जरूरी

मदन कौशिक ने कहा कि मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव का एक प्रमुख कारण नदियों में अत्यधिक सिल्ट जमा होना है। उन्होंने मानसून से पहले नदियों की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग के अधीन क्षेत्रों में भी डिसिल्टिंग कार्य आवश्यक है और सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें।

बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग की सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला ने सभी जिलाधिकारियों को खाद्यान्न, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि आपदा या मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, सचिव सी. रविशंकर, सचिव रणवीर सिंह चौहान, आईजी कुमाऊं ऋद्धिम अग्रवाल, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, आईजी फायर सुनील मीणा, यूकाडा के सीईओ आशीष चौहान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


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