पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार संकल्पबद्ध : मुख्यमंत्री धामी

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Lucknow, 7 May, 2026 07:46 PM
पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार संकल्पबद्ध : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून : देहरादून के निरंजनपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार इस क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं एवं योजनाओं के माध्यम से मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को भी फ्लैग ऑफ किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा “प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना”, “राष्ट्रीय पशुधन मिशन”, “राष्ट्रीय गोकुल मिशन”, “पशुपालन अवसंरचना विकास कोष” और “किसान क्रेडिट कार्ड” जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ उत्तराखंड के पशुपालकों और किसानों को भी मिल रहा है।


उन्होंने बताया कि राज्य सरकार “मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन” के अंतर्गत पशुधन इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दे रही है, जिसमें पात्र लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक ऋण अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। गोट वैली और पोल्ट्री वैली जैसी योजनाओं के माध्यम से भी ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में गौ पालन, बकरी पालन और भेड़ पालन के क्षेत्र में साढ़े 11 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, जबकि मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के तहत 4 हजार से अधिक युवा और महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं।


मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 60 विकासखंडों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स संचालित की जा रही हैं। साथ ही प्रत्येक जनपद में मॉडल पशु चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत क्षेत्रों के पशुपालकों को आईटीबीपी के माध्यम से सीधा बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में राज्य के दुग्ध उत्पादन में प्रतिवर्ष लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और बीते वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को लगभग 380 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की प्रसिद्ध “बद्री गाय” के “बद्री घी” को देश का पहला जीआई टैग प्राप्त हुआ है, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है।


मत्स्य पालन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्राउट फार्मिंग उत्तराखंड में स्वरोजगार का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। इसके प्रोत्साहन के लिए सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 170 करोड़ रुपये की ट्राउट प्रोत्साहन योजना शुरू की है। उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में ट्राउट हैचरी स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड को हाई वैल्यू फिश प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।


कार्यक्रम के दौरान विभिन्न पशुपालकों और उद्यमियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। हरिद्वार के पशुपालक हरिकिशन लखेड़ा ने बताया कि ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म योजना के तहत उन्होंने 50 गायें खरीदीं और वर्तमान में प्रतिदिन 300 लीटर दूध उत्पादन कर रहे हैं। वहीं डोईवाला के अमित सिंह ने एफपीओ के माध्यम से चारे के उत्पादन का कार्य शुरू कर 386 लोगों को रोजगार से जोड़ा है।


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के क्षेत्र में कई नवाचार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि गोट वैली परियोजना से हजारों लाभार्थियों को जोड़ा गया है तथा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी प्रदान की जा रही है।


कार्यक्रम में अध्यक्ष गौ सेवा आयोग राजेंद्र प्रसाद अंथवाल, उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोघा, उत्तराखंड मत्स्य पालक विकास अभिकरण के उपाध्यक्ष उत्तम दत्ता, सीमा चौहान तथा अपर सचिव संतोष बडोनी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


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