उत्तराखंड में मौसम का कहर: ऑरेंज अलर्ट के बीच प्रशासन अलर्ट, आपदा सचिव ने दिए सख्त निर्देश
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 3 May, 2026 10:46 PMदेहरादून। Vinod Kumar Suman ने राज्य में जारी ऑरेंज अलर्ट और रविवार को आए आंधी-तूफान व बारिश के बाद सभी जनपदों के साथ बैठक कर स्थिति का विस्तृत जायजा लिया। बैठक में विभिन्न जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर हालात की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव ने बताया कि मौसम विभाग ने सोमवार और मंगलवार के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसके मद्देनजर सभी जिलों को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मौसम से जुड़ी सभी चेतावनियां राज्य और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के माध्यम से तत्काल आम जनता तक पहुंचाई जाएं, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें।
मौसम विभाग के अनुसार 4 मई 2026 को देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जिलों में तथा 5 मई 2026 को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि, तेज बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खराब मौसम के चलते बाधित सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द खोला जाए, ताकि आमजन को परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर सड़कों के अवरुद्ध होने की सूचना मिली थी, जिनमें अधिकांश मार्ग बहाल कर दिए गए हैं, जबकि शेष को जल्द सुचारु करने के निर्देश दिए गए हैं।
चारधाम यात्रा को देखते हुए उन्होंने विशेष रूप से हवाई सेवाओं को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर सेवाएं पूरी तरह मौसम की स्थिति के अनुरूप ही संचालित की जाएं और प्रतिकूल मौसम में किसी भी प्रकार का जोखिम न लिया जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
Uttarakhand के सभी जिलों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने, आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें, अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि किसी भी संभावित आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके।


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