महिला सशक्तिकरण पर राजनीति न हो, नारी शक्ति वंदन अधिनियम जल्द लागू हो : मुख्यमंत्री धामी

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Lucknow, 28 Apr, 2026 05:36 PM
महिला सशक्तिकरण पर राजनीति न हो, नारी शक्ति वंदन अधिनियम जल्द लागू हो : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के प्रयासों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है और इसे शीघ्र लागू किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री धामी मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सदन के समक्ष सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और प्रदेश की प्रेरणादायी महिला विभूतियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती गौरा देवी, टिंचरी माई, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी और हंसा धनाई जैसी वीरांगनाओं की कर्मभूमि रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के रूप में नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान की आराधना की जाती है। इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने देश को नई दिशा दी है। आज महिलाएं केवल सहभागिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बताया युगांतकारी कदम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में युगांतकारी कदम है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है, जबकि महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के लिए ठोस पहल केंद्र सरकार ने की है।

केंद्र सरकार की योजनाओं का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता बनाया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।

उन्होंने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को कानूनी संरक्षण दिया गया है। आज सामान्य परिवारों की बेटियां देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसका उदाहरण हैं।

उत्तराखंड में महिलाओं के लिए कई योजनाएं

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस वर्ष जेंडर बजट के अंतर्गत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और एकल महिला स्वरोजगार योजना के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

सरकार स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण दे रही है, जबकि महिलाओं को 2 लाख रुपये तक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं।

महिलाओं को आरक्षण और खेल सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू है। खेलों में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए लोहाघाट में 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।

यूसीसी और महिला अधिकारों पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है। इससे महिलाओं को कई सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति मिली है।

उन्होंने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे विषय पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सकारात्मक रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।


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