चारधाम यात्रा के आपदा सुरक्षित संचालन के लिए उत्तराखण्ड को हर सहयोग देगा एनडीएमए- कृष्णा वत्स
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 8 Apr, 2026 10:29 PMदेहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य कृष्णा एस वत्स ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण आयोजन है और इसे सुरक्षित व सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए एनडीएमए राज्य को हर संभव सहयोग देगा। उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रियों को इम्पैक्ट बेस्ड फोरकास्टिंग के माध्यम से समय पर अलर्ट भेजे जाएं, ताकि संभावित आपदाओं से बचाव किया जा सके।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान कृष्णा एस वत्स ने विभागीय अधिकारियों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर रूट स्पेसिफिक रिस्क मॉनिटरिंग और माइक्रो लेवल पर जोखिम आकलन को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने संवेदनशील स्थलों की पहचान कर वहां विशेष कार्ययोजना बनाने, धामों की कैरिंग कैपेसिटी का ध्यान रखने और एंटीसिपेटरी एक्शन (पूर्वानुमान आधारित कार्रवाई) को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही यात्रियों तक समयबद्ध चेतावनी संदेश पहुंचाने पर जोर दिया।
क्राउड और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर जोर
एनडीएमए सदस्य ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान भीड़ और यातायात प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को और सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ मोबाइल हेल्थ यूनिट्स बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
हेली सेवाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
उन्होंने हेली सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने और सभी सेवा प्रदाताओं द्वारा निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
‘शून्य मृत्यु’ लक्ष्य पर जोर
एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज ने कहा कि उत्तराखंड ने चारधाम यात्रा प्रबंधन में एक बेंचमार्क स्थापित किया है। उन्होंने ‘शून्य मृत्यु’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर बल दिया। साथ ही यात्रियों के मोबाइल में ‘सचेत ऐप’ अनिवार्य रूप से डाउनलोड कराने के निर्देश दिए।
आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप्स को बढ़ावा
कृष्णा एस वत्स ने आपदा प्रबंधन में एआई और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और स्टार्टअप्स को अवसर देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने छोटे शहरों और प्रमुख पड़ाव स्थलों पर इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर स्थापित करने पर भी जोर दिया।
मॉक अभ्यास से परखी गई तैयारियां
टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान काल्पनिक आपदा परिदृश्यों के आधार पर विभिन्न विभागों की तैयारियों का परीक्षण किया गया। इसमें आपदा की सूचना मिलने के बाद त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों के प्रबंधन, विभागों के बीच समन्वय और संचार व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन किया गया।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस तरह के मॉक अभ्यास वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम हैं और इससे विभागों के बीच समन्वय तथा त्वरित निर्णय क्षमता में सुधार होता है।


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