मुस्लिम संस्थान के लिए दी जमीन आईएमए की सुरक्षा को खतरा, आवंटन निरस्त करें सरकार : भाजपा
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 9 Feb, 2026 05:33 PMदेहरादून 9 फरवरी। भाजपा ने कांग्रेस सरकार द्वारा मुस्लिम शिक्षण संस्थान के लिए दी गई जमीन को आईएमए की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए, उसे तत्काल सरकार में निहित किए जाने की अपील की है।
पार्टी के वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने इस भूमि को मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की मंशा रखने वालों की साजिश का हिस्सा बताया और कहा कि ऐसे षड्यंत्रों से देवभूमि को बचाने के लिए कांग्रेस से मुक्ति जरूरी है।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चमोली ने कहा कि मीडिया में आई खबरों से हुए खुलासों में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकारों की खतरनाक साजिश सामने आई है। उन्होंने बताया कि सहसपुर धौलास में वर्ष 2004 में तिवारी सरकार द्वारा लगभग 100 बीघा जमीन मोहम्मद मदनी को शिक्षण कार्य के लिए लीज पर दी गई थी। बाद में इसका लैंड यूज बदलवाने के प्रयास किए गए और आपत्तियों के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। अब प्रकरण खारिज होने के बावजूद भूमाफियाओं द्वारा पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए भूमि को खुर्द-बुर्द करने के प्रयास किए जा रहे थे। फिलहाल एमडीडीए ने कार्रवाई करते हुए भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है।
उन्होंने तत्कालीन और बाद की कांग्रेस सरकारों की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या तिवारी सरकार में शिक्षण संस्थान के लिए आवंटित इसी जमीन पर कांग्रेस मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलना चाहती थी? क्योंकि वर्ष 2022 के चुनाव के दौरान सहसपुर क्षेत्र में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की बात सामने आई थी, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की देखरेख में आगे बढ़ाई गई। भाजपा के विरोध और जनता द्वारा चुनाव में कांग्रेस को नकारे जाने के बाद उनकी मंशा पूरी नहीं हो सकी। आज षड्यंत्र उजागर होने पर स्पष्ट हुआ कि भूमाफियाओं द्वारा इस भूमि को खुर्द-बुर्द किया जा रहा था।
उन्होंने शासन-प्रशासन द्वारा इस प्रकरण में दिखाई गई तत्परता की सराहना करते हुए सरकार से भूमि को वापस कब्जे में लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील आईएमए परिसर से सटा हुआ है, जिससे उसकी सुरक्षा को गंभीर खतरा है। उस समय भी सेना द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने इसे नजरअंदाज करते हुए आवंटन निरस्त नहीं किया। अब स्थिति स्पष्ट होने के बाद सरकार को तत्काल संज्ञान लेते हुए भूमि आवंटन निरस्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह प्रकरण अन्य मामलों की तरह साबित करता है कि देवभूमि के देवत्व को बचाने के लिए राज्य को कांग्रेस से निजात दिलाना आवश्यक है। यदि कांग्रेस प्रभावी रही तो उत्तराखंड की जनसांख्यिकी और धार्मिक-सांस्कृतिक स्वरूप निश्चित रूप से खतरे में पड़ सकता है।


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