चुनाव प्रेक्षकों की भूमिका पर देहरादून में अंतरराष्ट्रीय मंथन, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव पर रहा जोर

20 से अधिक विश्वविद्यालयों और कई देशों के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव, चुनाव प्रक्रिया में जनविश्वास बनाए रखने पर विशेष चर्चा

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Lucknow, 24 Jul, 2026 07:03 PM
चुनाव प्रेक्षकों की भूमिका पर देहरादून में अंतरराष्ट्रीय मंथन, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव पर रहा जोर

देहरादून।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार को चुनाव प्रेक्षकों (इलेक्टोरल ऑब्जर्वर्स) की भूमिका और चुनावी पारदर्शिता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंथन हुआ। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में “मॉडल स्टैंडर्ड्स फॉर इलेक्टोरल ऑब्जर्वर” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें भारत सहित कई देशों के चुनाव विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

सम्मेलन में संयुक्त राज्य अमेरिका, रोमानिया, आयरलैंड, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, हंगरी और नेपाल की चुनाव प्रबंधन संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद और विभिन्न संकायों के 400 से अधिक प्रतिभागी हाइब्रिड मोड के माध्यम से शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने कहा कि यह सम्मेलन इंटरनेशनल आईडिया (International IDEA) की अध्यक्षता के दौरान भारत की उस सोच को प्रतिबिंबित करता है, जिसके तहत चुनाव प्रबंधन संस्थाओं, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रेक्षक की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की निगरानी करना तथा चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनता के विश्वास को मजबूत करना है।

भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भारती ने वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव प्रेक्षकों की सक्रिय और निष्पक्ष भूमिका से पूरी चुनावी मशीनरी अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर परिस्थिति में निर्वाचन प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक प्रेक्षक का सर्वोच्च दायित्व है।

ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. तवस्सुम नकवी ने स्वागत भाषण में कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा शिक्षण संस्थानों और विषय विशेषज्ञों के सहयोग से आधुनिक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।

सम्मेलन के दूसरे तकनीकी सत्र में सीजीएसटी देहरादून के अपर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता ने चुनाव व्यय प्रेक्षक (एक्सपेंडिचर ऑब्जर्वर) की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए चुनाव प्रचार पर प्रभावी निगरानी के लिए आधुनिक तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

स्टेट पुलिस ट्रेनिंग नोडल आईजी अनंत शंकर ताकवले ने पुलिस प्रेक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वैश्विक स्तर पर चुनावी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकता है।

विशेष परिचर्चा सत्र में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने विभिन्न देशों की चुनावी व्यवस्थाओं में प्रेक्षकों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने में फील्ड प्रशासन की भूमिका को रेखांकित किया। इस सत्र का संचालन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की डॉ. तहा सिद्दीकी ने किया।

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में IIIDEM की डॉ. कृतिका माथुर, आईआईएम काशीपुर के प्रो. दिलीप कुमार, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के प्रो. राधेश्याम झा, दून यूनिवर्सिटी के प्रो. हर्ष डोभाल तथा ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी की प्रो. डेजी एलेक्जेंडर ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए। सत्र का संचालन डॉ. हिमानी बिंजोला ने किया।

कार्यक्रम में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षाविद, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

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