उत्तराखंड की विकास यात्रा में उद्योग जगत बने भागीदार, सीएसआर के तहत राज्य में निवेश बढ़ाने की अपील: मुख्यमंत्री धामी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 10 Jul, 2026 04:50 PMदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्योग जगत से उत्तराखंड की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत अधिक से अधिक परियोजनाएं राज्य में संचालित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और सीमांत राज्य के समग्र विकास में कॉर्पोरेट क्षेत्र का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विभिन्न उद्योग समूहों, केंद्रीय उपक्रमों, सीएसआर पार्टनर्स और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तीर्थस्थलों पर किया गया दान विशेष महत्व रखता है, इसलिए देवभूमि उत्तराखंड में सीएसआर के माध्यम से किया गया योगदान भी समाज के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का साझा संकल्प है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कौशल विकास, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम विकास और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही अनेक कॉर्पोरेट समूहों ने उत्तराखंड के लिए नई परियोजनाओं की भी घोषणा की।
पर्वतीय राज्य की चुनौतियां अलग
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और पारिस्थितिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। यहां विकास कार्यों में अधिक संसाधन और अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता होती है। इसलिए राज्य सरकार ऐसा विकास मॉडल अपनाने पर जोर दे रही है, जिसमें रोजगार सृजन, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट जगत का अनुभव, आधुनिक प्रबंधन और सामाजिक उत्तरदायित्व इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
निवेश और उद्योगों के लिए बेहतर माहौल
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए हैं। वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य को 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को अब तक धरातल पर उतारा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि व्यापार सुगमता के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है तथा औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक्स नीति, स्टार्टअप नीति और एमएसएमई नीति सहित 30 से अधिक नीतियां लागू कर उद्योगों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया गया है। स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं और 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड भी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम है कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) इंडेक्स में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर रहा है। साथ ही राज्य को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में ‘एचीवर्स’ और स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उद्योगों के लिए पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इससे उद्योगों को लाइसेंस, भूमि आवंटन और अन्य स्वीकृतियों में अनावश्यक बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड को देश का अग्रणी इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट बनाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की पारदर्शी नीतियां और कॉर्पोरेट क्षेत्र की विशेषज्ञता मिलकर राज्य में सस्टेनेबल इकोनॉमी के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
इन कंपनियों के साथ हुए एमओयू
कार्यक्रम के दौरान किया, हुंडई, लर्नेंट-इन्फोसिस फाउंडेशन, ओएनजीसी, आईटीसी, महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड, आदित्य बिरला कैपिटल, फिनोलेक्स और पैनासोनिक सहित कई प्रमुख कंपनियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय, सिडकुल के एमडी डॉ. सौरभ गहरवार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



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