मुंबई महापौर को लेकर सियासी घमासान, शिंदे एक साल के पद पर अड़े; फैसला अब दिल्ली में संभव

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Lucknow, 21 Jan, 2026 03:40 PM
मुंबई महापौर को लेकर सियासी घमासान, शिंदे एक साल के पद पर अड़े; फैसला अब दिल्ली में संभव

मुंबई | 21 जनवरी 2026: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के महापौर पद को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी का हवाला देते हुए एक साल के लिए महापौर पद की मांग पर अड़े हुए हैं। इस बीच दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं का दिल्ली पहुंचना संकेत दे रहा है कि अब इस विवाद का समाधान केंद्रीय स्तर पर हो सकता है। शिंदे गुट का कहना है कि बालासाहेब ठाकरे के शताब्दी वर्ष में शिवसेना का महापौर होना कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावना से जुड़ा मामला है। शिवसेना नेताओं का तर्क है कि यदि एक साल के लिए यह पद मिलता है तो इससे न केवल पार्टी का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उद्धव ठाकरे गुट पर भी राजनीतिक दबाव बनेगा। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। मंगलवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष शेलार, मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और शिंदे गुट के नेता राहुल शेवाले दिल्ली पहुंचे। उनके केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले महाराष्ट्र सदन में दोनों दलों की अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें बीएमसी की स्थायी समिति, सुधार समिति, शिक्षा समिति और बेस्ट समिति जैसे महत्वपूर्ण पदों को लेकर भी चर्चा होगी। शिवसेना सूत्रों के अनुसार, महापौर पद और अन्य समितियों पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद लिया जाएगा। संभावना है कि 25 जनवरी को फडणवीस और शिंदे के बीच अहम बैठक होगी। 227 सदस्यीय बीएमसी में भाजपा के पास 89 पार्षद हैं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना के 29 पार्षद हैं। इसी बीच शिंदे गुट के सभी पार्षद बांद्रा के पांच सितारा होटल से बाहर आ गए हैं और उन्होंने कोंकण डिविजनल कमिश्नर के पास खुद को एक अलग समूह के रूप में पंजीकृत कराया है, जो चुनाव के बाद की औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है। BMC मेयर पद पर सस्पेंस बरकरार, शिंदे की एक साल की मांग पर भाजपा-शिवसेना आमने-सामने मुंबई महापौर पद को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान और तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी का हवाला देते हुए एक साल के लिए शिवसेना का मेयर बनाए जाने की मांग पर अड़े हैं। इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर हलचल बढ़ा दी है। शिंदे गुट का कहना है कि शताब्दी वर्ष में शिवसेना का महापौर होना कार्यकर्ताओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है। उनका मानना है कि इससे पार्टी की पहचान मजबूत होगी और उद्धव ठाकरे गुट पर भी राजनीतिक दबाव बनेगा। इसी मांग को लेकर पार्टी नेतृत्व लगातार रणनीति पर मंथन कर रहा है। मामले के समाधान के लिए भाजपा और शिवसेना के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। भाजपा नेता आशीष शेलार, मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और शिंदे गुट के राहुल शेवाले की केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की संभावना है। माना जा रहा है कि अब महापौर पद पर अंतिम फैसला दिल्ली स्तर पर लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद शिंदे के साथ बैठक हो सकती है, जिसमें महापौर और बीएमसी की प्रमुख समितियों पर निर्णय होगा। इस बीच शिंदे गुट के सभी 29 पार्षद बांद्रा के होटल से बाहर आ गए हैं और उन्होंने खुद को अलग समूह के रूप में पंजीकृत करा लिया है, जिससे सियासी संकेत और भी स्पष्ट हो गए हैं। 

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