अजित-सुनेत्रा और 'अंक 6' का तिलिस्म: 40 साल पहले शादी की तारीख में ही लिख दी गई थी 420 दिन की सत्ता और मौत की पटकथा!
विवाह से लेकर शपथ और मौत के समय तक... 'शुक्र' के अंक ने तय किया बारामती का भविष्य
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 1 Feb, 2026 02:08 PM-विजय दीक्षित
(सीनियर एडिटर, अमृत बाजार पत्रिका/युगान्तर समूह कोलकाता)
इंदौर/मुंबई, 31 जनवरी 2026:
राजनीति में फैसले बंद कमरों में होते हैं, लेकिन कभी-कभी नियति (Destiny) के फैसले गणित के अंकों में छिपे होते हैं। 28 जनवरी को अजित पवार का जाना और 31 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का गद्दी संभालना—यह महज एक राजनीतिक उत्तराधिकार नहीं, बल्कि 'अंक 6' का एक ऐसा अद्भुत चक्र है जिसने 40 साल पहले ही आज के दिन की पटकथा लिख दी थी।
ज्योतिषीय गणना और तथ्यों का विश्लेषण करने पर जो 'कोसमिक कनेक्शन' सामने आया है, वह चौंकाने वाला है।
1. शादी की तारीख में छिपा था '420 दिन' का राज
अजित पवार के जीवन का सबसे बड़ा रहस्य उनकी शादी की तारीख में छिपा था। 30 दिसंबर 1985 को जब वे सुनेत्रा पवार के साथ परिणय सूत्र में बंधे, तो तारीख (30) और माह (12) का जोड़ 42 था (30+12=42, यानी 4+2= 6)।
नियति देखिए, अजित पवार का अंतिम कार्यकाल ठीक 420 दिनों का रहा। यहाँ भी 4+2+0 का जोड़ 6 ही आता है। यानी जिस अंक (6) से उनका गृहस्थ जीवन शुरू हुआ, उसी अंक पर उनकी सत्ता का अंत हुआ।
2. मौत और पूर्वाभास: सब कुछ '6' के घेरे में
अजित दादा को शायद अनहोनी का अहसास था। 24 जनवरी (2+4= 6) को उन्होंने कहा था— "नियति के आगे किसी की नहीं चलती।"
और जब 28 जनवरी को विमान हादसा हुआ, तो घड़ी की सुइयां सुबह 8:43 पर थमी थीं। 8+4+3 का जोड़ 15 होता है और 1+5 का मूलांक फिर 6 आता है। अजित पवार 6वीं बार डिप्टी सीएम बने थे, और 6 अंक पर ही विदा हुए।
3. शुक्र का खेल: पति की सत्ता, पत्नी के नाम
अंक ज्योतिष में 6 अंक का स्वामी 'शुक्र' (Venus) है, जो 'पत्नी' और 'ऐश्वर्य' का कारक है। अजित दादा (जिनका मूलांक भी 6 था) के जाने के बाद सत्ता का हस्तांतरण ठीक उसी अंक के प्रभाव में हुआ:
शपथ की तारीख: 31 जनवरी 2026 (3+1+1+2+0+2+6 = 15 = 6)।
शपथ का समय: शाम 5:01 बजे (5+1 = 6)।
अजित पवार का 'शुक्र' उनकी मृत्यु के साथ अस्त नहीं हुआ, बल्कि उसने सत्ता का राजयोग उनकी पत्नी को सौंप दिया।
4. मंगल और चंद्रमा का अद्भुत योग: 11वीं और पहली
सुनेत्रा पवार का मूलांक 9 (जन्म 18 अक्टूबर, 1+8=9) है, जिसका स्वामी 'मंगल' (Mars) है। मंगल 'साहस' और 'पहल' का प्रतीक है, इसीलिए वे महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनीं।
साथ ही, वे राज्य की 11वीं डिप्टी सीएम हैं (1+1=2)। अंक 2 'चंद्रमा' (माता) का है। अब महाराष्ट्र उनमें एक 'मां' की छवि देखेगा। 6 (शुक्र) ने उन्हें पद दिया और 9 (मंगल) ने इतिहास रचने की शक्ति।
निष्कर्ष:
यह संयोग नहीं, ग्रहों की वह गणितीय व्यवस्था है जो बताती है कि अजित दादा का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनका 'अंक 6' आज भी महाराष्ट्र की सत्ता के सिंहासन पर 'सुनेत्रा' के रूप में विराजमान है।


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