किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों की निर्णायक कार्रवाई, पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का अंत

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Lucknow, 23 Feb, 2026 07:53 PM
किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों की निर्णायक कार्रवाई, पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का अंत

जम्मू | 23 फरवरी 2026 किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले एक महीने से चल रहे व्यापक अभियान के तहत चार कुख्यात पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को मार गिराया गया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षाबल पूरी मजबूती और रणनीति के साथ मोर्चा संभाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अप्रैल और मई 2025 से ही इलाके में सक्रिय एक बड़े आतंकी समूह पर नजर रखी जा रही थी। अप्रैल में इस नेटवर्क के तीन प्रमुख आतंकियों को ढेर किया गया था, लेकिन सैफुल्लाह, आदिल और उनके अन्य साथी लंबे समय तक छिपकर गतिविधियां चला रहे थे। इन्हें पकड़ने के लिए खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार तलाशी और पीछा किया गया। इस कड़ी में 14 जनवरी 2026 को ऑपरेशन “त्राशी-I” शुरू किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सेना की इकाइयों ने मिलकर मोर्चा संभाला। 18 जनवरी को आतंकियों के एक ठिकाने का पता चला, जहां से हथियारों का जखीरा बरामद किया गया। इसके बाद 4 फरवरी को आतंकी आदिल मारा गया और उसी दिन ऑपरेशन के तहत दो और आतंकियों को ढेर कर दिया गया। अंतिम और निर्णायक मुठभेड़ 22 फरवरी 2026 को हुई, जब दुर्गम पहाड़ी इलाके और खराब मौसम के बावजूद सुरक्षाबलों ने बेहतरीन समन्वय दिखाते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन में सेना के खोजी कुत्ते टायसन की भूमिका भी अहम रही, जो आतंकियों की मौजूदगी का सुराग देते हुए घायल हो गया। तलाशी में तीन एके-47 राइफल और अन्य युद्ध सामग्री बरामद हुई। पूरे अभियान में सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं हुआ, जो उनकी पेशेवर तैयारी और आपसी तालमेल का बड़ा उदाहरण है। किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों की निर्णायक कार्रवाई, पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का अंत किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले एक महीने से चल रहे व्यापक अभियान के तहत चार कुख्यात पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को मार गिराया गया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षाबल पूरी मजबूती और रणनीति के साथ मोर्चा संभाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अप्रैल और मई 2025 से ही इलाके में सक्रिय एक बड़े आतंकी समूह पर नजर रखी जा रही थी। अप्रैल में इस नेटवर्क के तीन प्रमुख आतंकियों को ढेर किया गया था, लेकिन सैफुल्लाह, आदिल और उनके अन्य साथी लंबे समय तक छिपकर गतिविधियां चला रहे थे। इन्हें पकड़ने के लिए खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार तलाशी और पीछा किया गया। इस कड़ी में 14 जनवरी 2026 को ऑपरेशन “त्राशी-I” शुरू किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सेना की इकाइयों ने मिलकर मोर्चा संभाला। 18 जनवरी को आतंकियों के एक ठिकाने का पता चला, जहां से हथियारों का जखीरा बरामद किया गया। इसके बाद 4 फरवरी को आतंकी आदिल मारा गया और उसी दिन ऑपरेशन के तहत दो और आतंकियों को ढेर कर दिया गया। अंतिम और निर्णायक मुठभेड़ 22 फरवरी 2026 को हुई, जब दुर्गम पहाड़ी इलाके और खराब मौसम के बावजूद सुरक्षाबलों ने बेहतरीन समन्वय दिखाते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन में सेना के खोजी कुत्ते टायसन की भूमिका भी अहम रही, जो आतंकियों की मौजूदगी का सुराग देते हुए घायल हो गया। तलाशी में तीन एके-47 राइफल और अन्य युद्ध सामग्री बरामद हुई। पूरे अभियान में सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं हुआ, जो उनकी पेशेवर तैयारी और आपसी तालमेल का बड़ा उदाहरण है। 

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