लेह में गूंजा बुद्ध का शांति संदेश, 2569वीं वैशाख पूर्णिमा पर वैश्विक संगम

*01 से 14 मई तक कर सकेंगे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन *लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का किया सम्मान *लेह से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का आह्वान- उत्तर प्रदेश से करें 'बोधि यात्रा' की शुरुआत* *भगवान बुद्ध की विरासत से दुनिया को जोड़ रहा उत्तर प्रदेश- जयवीर सिंह

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Lucknow, 3 May, 2026 06:08 PM
लेह में गूंजा बुद्ध का शांति संदेश, 2569वीं वैशाख पूर्णिमा पर वैश्विक संगम

लखनऊ/लेह, 03 मई 2026 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में 2569वीं वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को आस्था, अध्यात्म और वैश्विक विमर्श का भव्य संगम देखने को मिला। महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (MIMC) में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय हिमालयन बौद्ध सम्मेलन’ में उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सहभागिता की। तथागत के पवित्र अवशेषों के दिव्य दर्शन के बीच यह सम्मेलन 'भारत और उससे परे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में हिमालयी बौद्ध धर्म के योगदान' जैसे महत्वपूर्ण विषय पर वैश्विक चिंतन का केंद्र बना। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 'भगवान बुद्ध की पावन भूमि उत्तर प्रदेश से प्रारंभ हुई तथागत की 'बोधि यात्रा' आज सीमाओं से परे शांति का संदेश सम्पूर्ण विश्व में प्रसारित कर रही है। 1 से 14 मई 2026 तक आयोजित 2569वीं वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में यह भव्य समारोह श्रृंखला, धार्मिक उत्सव के साथ वैश्विक एकता और मानव कल्याण के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का लद्दाख प्रवास के दौरान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सम्मान किया। इस अवसर पर मंत्री जयवीर सिंह ने भी उपराज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट कर पारंपरिक आतिथ्य और आपसी सहयोग की भावना को सुदृढ़ किया। *सांस्कृतिक पर्यटन के नए युग का प्रारंभ* उन्होंने कहा, 'हिमालयी क्षेत्र लेह की धरती पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का आगमन ऐतिहासिकता के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के नए युग का प्रारंभ भी है।

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित पिपरहवा से वर्ष 1898 में प्राप्त छठी शताब्दी ईसा पूर्व के ये अवशेष, मूर्तियां एवं पांडुलिपियां भगवान बुद्ध की उपस्थिति और उनकी सार्वभौमिकता के सशक्त प्रतीक हैं। पखवाड़े भर आयोजित दुर्लभ प्रदर्शनी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष अनुभव प्रदान करेंगे।'

*बौद्ध सर्किट बना वैश्विक आकर्षण* मंत्री जयवीर सिंह ने बौद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में 'बौद्ध सर्किट' का तेजी से विकास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि वर्ष 2025 में प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की और 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ।

कोरोना महामारी के बाद बौद्ध पर्यटन ने जिस तेजी से रफ्तार पकड़ी है, वह भी उल्लेखनीय है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 में 22.40 लाख, 2023 में 47 लाख, 2024 में 61.47 लाख और 2025 में लगभग 82 लाख पर्यटकों का आगमन इस लगातार बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास को दर्शाता है।' *प्रदेश के बौद्ध स्थलों का विकास सरकार की प्राथमिकता* पर्यटन मंत्री ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश सरकार भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के बौद्ध स्थलों के विकास पर लगभग 226.08 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है, जो सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।' *'वैश्विक अशांति में बुद्ध के संदेश ही सार्थक'* उन्होंने कहा, 'वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जब दुनिया के कई देश युद्ध और संघर्ष की विभीषिका से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में भगवान बुद्ध का शांति संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

जिस प्रकार आज दुनिया अशांति, निराशा, क्रोध, ईर्ष्या, हताशा और चिंता जैसे नकारात्मक भावों से जूझ रही है, उससे मुक्ति का मार्ग हमें तथागत के उपदेशों में ही दिखाई देता है।' उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने ‘अंतरराष्ट्रीय हिमालयन बौद्ध सम्मेलन’ में शामिल सभी महानुभावों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से वैश्विक स्तर पर बौद्ध विरासत को नई पहचान मिलती है।

उन्होंने देश-विदेश से आए बौद्ध श्रद्धालुओं से अपील की, कि वे अपनी 'बोधि यात्रा' की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पवित्र स्थलों से करें, जहां भगवान बुद्ध से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत विद्यमान है।'

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