अयोध्या: राम मंदिर में वीआईपी पास की व्यवस्था अब समाप्त, सब ने किया फैसले का स्वागत
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 5 Aug, 2026 05:44 PMअयोध्या । श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में राम दरबार के दर्शन के लिए वीआईपी पास की व्यवस्था समाप्त किए जाने के फैसले का अयोध्या के संतों ने स्वागत किया है। संतों ने इसे समानता, पारदर्शिता और भक्तों की सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि भगवान के दरबार में किसी भी प्रकार का वीआईपी कल्चर नहीं होना चाहिए। कंचन भवन के महंत विजय दास ने मिडिया से बातचीत में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला निश्चित रूप से किसी ठोस कारण को ध्यान में रखकर लिया गया होगा। बिना किसी वजह के ऐसा निर्णय नहीं लिया जाता। इस व्यवस्था से अब देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिलेगी और वे बिना किसी विशेष बाधा के रामलला सरकार के साथ-साथ राम दरबार के भी दर्शन कर सकेंगे। लंबे समय से भक्त इस व्यवस्था की प्रतीक्षा कर रहे थे और ट्रस्ट का यह कदम स्वागत योग्य है। रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने भी वीआईपी पास की व्यवस्था को समाप्त करने के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर परिसर में वीआईपी व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर देनी चाहिए। दर्शन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें हर श्रद्धालु समान भाव से दर्शन कर सके और सामान्य कतार में खड़े किसी भी भक्त के मन में हीन भावना या भेदभाव का भाव उत्पन्न न हो। उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांग श्रद्धालुओं और अयोध्या के स्थानीय निवासियों के लिए जो विशेष व्यवस्थाएं हैं, वे उचित हैं और उन्हें जारी रहना चाहिए। लेकिन, वीआईपी और वीवीआईपी संस्कृति का अंत होना चाहिए। पूरे देश में अयोध्या का श्रीराम मंदिर ऐसा आदर्श मंदिर बनना चाहिए, जहां वीआईपी संस्कृति का कोई स्थान न हो। अन्य प्रमुख मंदिरों में भी इस तरह की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए क्योंकि यह समानता की भावना को मजबूत नहीं करती। दिवाकर आचार्य ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक सराहनीय और ऐतिहासिक निर्णय है। हालांकि, उन्होंने इस अवसर पर यह सवाल भी उठाया कि आखिर मंदिरों में वीआईपी संस्कृति की शुरुआत किसने की। भगवान श्रीराम के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले लोगों को कभी किसी पहचान पत्र, जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति के आधार पर विशेष सुविधा नहीं मिली थी। लंबे समय से ऐसी स्थिति देखने को मिल रही थी कि कुछ लोगों को वीआईपी व्यवस्था के माध्यम से सीधे भगवान श्रीरामलला के दर्शन कराए जाते थे, जबकि सच्ची श्रद्धा रखने वाले सामान्य भक्तों को घंटों लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता था। भगवान के दरबार में सभी श्रद्धालु समान हैं और किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए। दिवाकर आचार्य ने आगे कहा कि वीआईपी पास व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि यह भगवान श्रीराम के आदर्शों और समानता के संदेश के अनुरूप भी है।



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