नोएडा प्रकरण: 66 गिरफ्तारियों में 45 गैर-श्रमिक, आगजनी-भड़काने में बाहरी तत्वों की भूमिका

योगी सरकार की त्वरित कार्रवाई से स्थिति सामान्य, फैक्ट्रियों में कामकाज जारी, मजदूर और उद्योग दोनों कर रहे सहयोग, कुछ राजनीतिक दलों के इकोसिस्टम ने नोएडा के आर्थिक ढांचे को बर्बाद करने के लिए रची घिनौनी साजिश, भड़काने, आगजनी और पथराव करने वालों में भी अशिसंख्य श्रमिक ही नहीं

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Lucknow, 15 Apr, 2026 10:46 PM
नोएडा प्रकरण: 66 गिरफ्तारियों में 45 गैर-श्रमिक, आगजनी-भड़काने में बाहरी तत्वों की भूमिका

नोएडा, 15 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिक आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश को योगी सरकार ने कुछ ही घंटों में सख्ती और सूझबूझ के साथ नाकाम कर दिया। यह मामला श्रमिक असंतोष का नहीं, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कुछ राजनीतिक दलों और अर्बन नक्सल संगठनों की भूमिका सामने आई है। 


उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कुल 66 गिरफ्तारियों में से 45 लोग ऐसे हैं, जो वास्तविक श्रमिक नहीं थे। आगजनी की घटना में चिन्हित 17 में से 11 को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 8 गैर-श्रमिक हैं। वहीं भड़काने के आरोप में 32 लोगों की पहचान हुई, जिनमें से 19 को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 34 ऐसे लोगों को भी पकड़ा गया है, जो श्रमिक नहीं होते हुए भी कथित आंदोलन में शामिल होकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे।साजिश रचने के आरोप में 4 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है, जिनके कथित तौर पर कुछ संगठित नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है। अब तक गिरफ्तार हुए लोग अर्बन नक्सल संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं। 


उच्च स्तरीय सूत्रों ने बताया कि नोएडा के आर्थिक ढांचे को बर्बाद करने की एक घिनौनी, सुनियोजित और बड़े पैमाने की साजिश रची गई थी, जिसमें कुछ राजनीतिक दलों का पूरा इकोसिस्टम खुलकर शामिल था। ये पार्टियां मिलकर यूपी की प्रगति को कुचलने और नोएडा जैसे आर्थिक हब को आग में झोंकने की कुटिल चाल चल रही थीं। 


सूत्रों ने बताया कि आंदोलन के झूठे मुखौटे के पीछे छिपे चार दर्जन से ज्यादा यादव और मुस्लिम व्यक्ति पकड़े गए हैं, जो कुछ राजनीतिक दलों के एजेंडे के तहत अराजकता फैलाने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पूरे इलाके को आर्थिक रूप से लूटने की तैयारी में थे। ये तत्व न सिर्फ नोएडा की विकास यात्रा को रोकना चाहते थे, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारकर सत्ता के खेल में अपना स्वार्थ साधना चाहते थे। 


इतना ही नहीं, बंगाल, बिहार, यूपी समेत देश के अलग-अलग कोनों से आईं कुछ महिलाएं भी इस साजिश में सक्रिय रूप से शामिल पाई गई हैं, जिनकी भूमिका बेहद संदिग्ध और खतरनाक है। ये हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों की मदद कर रही थीं। इनका  मकसद अराजकता भड़का कर नोएडा को आग के हवाले कर देना था। यह पूरा खेल न सिर्फ एक राजनीतिक साजिश था, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने का देशद्रोही षड्यंत्र था, जिसे पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।


उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल्स और बाहरी राज्यों से आए तत्वों की भी भूमिका जांच के दायरे में है।  सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर माहौल को भड़काने का प्रयास किया गया।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। श्रमिकों के हित में वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों ने सहयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप नोएडा में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से सामान्य हो गई हैं और तमाम फैक्ट्रियों में कामकाज सामान्य तरीके से संचालित हो रहा है।


सरकार की त्वरित कार्रवाई का असर यह रहा कि जहां अन्य राज्यों में ऐसे विवादों के कारण उद्योग प्रभावित हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में स्थिति शीघ्र सामान्य हो गई। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार न केवल श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील है, बल्कि औद्योगिक माहौल को बिगाड़ने वाली किसी भी साजिश को विफल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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