लखनऊ में 24 से शुरू होगा रश्मिरथी पर्व, दिनकर की कृति पर तीन दिवसीय भव्य आयोजन
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 18 Apr, 2026 08:10 PMलखनऊ। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ के हीरक जयंती वर्ष पर राजधानी लखनऊ में 24 से 26 अप्रैल तक तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होगा। शनिवार को लोक भवन स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास, नई दिल्ली द्वारा सांस्कृतिक कार्य विभाग के सहयोग से कराया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि यह पर्व नई पीढ़ी को राष्ट्रीय मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों के जीवन से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।
24 अप्रैल को होगा शुभारंभ
कृषि मंत्री ने बताया कि 24 अप्रैल को राष्ट्रकवि दिनकर की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इस अवसर पर ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका का लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद दानवीर कर्ण के जीवन प्रसंगों पर आधारित ‘रश्मिरथी’ का भव्य नाट्य मंचन प्रस्तुत किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा विशिष्ट अतिथि रहेंगे।
विवेकानंद, तिलक और अटल जी पर भी कार्यक्रम
25 अप्रैल को स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर राष्ट्रीय परिसंवाद और नाट्य मंचन होगा। वहीं 26 अप्रैल को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के जीवन पर आधारित प्रस्तुति के साथ भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं पर संगीतमय नृत्य नाटिका ‘अटल स्वरांजलि’ प्रस्तुत की जाएगी।
शाम 5:30 बजे से होंगे कार्यक्रम
मंत्री शाही ने बताया कि तीनों दिनों में प्रतिदिन शाम 5:30 बजे से राष्ट्रीय परिसंवाद, नाट्य मंचन, काव्य पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही प्रसिद्ध चित्रकार सरदार मनजीत सिंह द्वारा दिनकर, विवेकानंद, तिलक और अटल जी के जीवन व साहित्य पर आधारित चित्रकला प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
युवाओं को मिलेगा राष्ट्र निर्माण का संदेश
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि ‘रश्मिरथी’ केवल साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समरसता और आत्मसम्मान का जीवंत दस्तावेज है। यह आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम है। इस आयोजन से युवाओं में कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना मजबूत होगी।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस तीन दिवसीय आयोजन में शामिल होकर महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं।


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