यूपी में 13.39 करोड़ मतदाता: अंतिम मतदाता सूची जारी, 84 लाख से ज्यादा नए नाम जुड़े
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Lucknow, 10 Apr, 2026 08:22 PM-आदित्य अमिताभ त्रिवेदी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा द्वारा शुक्रवार को लोकभवन, लखनऊ स्थित मीडिया सेंटर में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अंतर्गत विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक चला यह व्यापक पुनरीक्षण कार्यक्रम निर्वाचक नामावली के अंतिम प्रकाशन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 166 दिनों तक चले इस वृहद अभियान को सफल बनाने में प्रदेश के सभी 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), 12,758 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ), 18,026 बीएलओ सुपरवाइजरों और 1,77,516 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य किया। इसके साथ ही, सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 5,82,877 बूथ लेवल एजेंटों एवं करोड़ों मतदाताओं ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम की समय-रेखा (Timeline)
विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के तहत कार्यक्रम की घोषणा 27 अक्टूबर 2025 को की गई। इसके बाद गणना चरण 4 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2025 तक चला। मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन 6 जनवरी 2026 को किया गया। दावा एवं आपत्ति की अवधि 6 जनवरी से 6 मार्च 2026 तक निर्धारित की गई। इस दौरान नोटिस, सुनवाई, सत्यापन और दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया 6 जनवरी से 27 मार्च 2026 तक चली। अंततः 10 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई।
मसौदा बनाम अंतिम मतदाता सूची: आंकड़ों में बदलाव
6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 12,55,56,025 थी। इसमें 6,88,43,159 पुरुष (54.83%), 5,67,08,747 महिला (45.17%) और 4,119 तृतीय लिंग मतदाता शामिल थे। 18-19 आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या 3,33,981 (0.27%) थी, जबकि जेंडर रेशियो 824 दर्ज किया गया।
10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कुल मतदाता बढ़कर 13,39,84,792 हो गए। इसमें 7,30,71,061 पुरुष (54.54%), 6,09,09,525 महिला (45.46%) और 4,206 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं। 18-19 आयु वर्ग के मतदाता बढ़कर 17,63,360 (1.32%) हो गए हैं। जेंडर रेशियो में भी सुधार हुआ है और यह बढ़कर 834 हो गया है।
मसौदा से अंतिम सूची के बीच कुल 84,28,767 मतदाताओं की वृद्धि हुई, जिसमें 42,27,902 पुरुष, 42,00,778 महिला और 87 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं। 18-19 आयु वर्ग में 14,29,379 नए मतदाता जुड़े हैं। जेंडर रेशियो में 10 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
जिले और विधानसभा क्षेत्र जहां हुई सर्वाधिक वृद्धि
मतदाता संख्या में सर्वाधिक वृद्धि वाले जिलों में प्रयागराज (3,29,421), लखनऊ (2,85,961), बरेली (2,57,920), गाजियाबाद (2,43,666) और जौनपुर (2,37,590) शामिल हैं।
विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो साहिबाबाद (82,898), जौनपुर (56,118), लखनऊ पश्चिम (54,822), लोनी (53,679) और फिरोजाबाद (47,757) में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई।
नोटिस, सुनवाई और सत्यापन की विस्तृत प्रक्रिया
पुनरीक्षण के दौरान 1.04 करोड़ मतदाताओं का मिलान नहीं हो सका, जबकि 2.22 करोड़ मतदाताओं में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन सभी मामलों में नोटिस जारी किए गए। नोटिस जारी करने की पहली तिथि 14 जनवरी 2026 तथा सुनवाई की पहली तिथि 21 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी।
प्रदेश में कुल 5,621 नोटिस सुनवाई केंद्र स्थापित किए गए, जहां 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और 12,758 सहायक अधिकारी तैनात किए गए। 27 मार्च 2026 तक सभी सुनवाइयां शत-प्रतिशत पूरी कर ली गईं।
निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि सुनवाई के दौरान मतदाताओं को अधिकतम सुविधा प्रदान की जाए। कई स्थानों पर मतदान केंद्रों पर ही सुनवाई की व्यवस्था की गई, जिससे मतदाताओं को न्यूनतम दूरी तय करनी पड़ी। बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा दस्तावेज जमा कराने में भी सहयोग दिया गया।
तार्किक विसंगतियों के मामलों में बीएलओ द्वारा नोटिस मतदाता या उनके परिजन को देकर पावती एवं फोटो अपलोड की गई, साथ ही आवश्यक अभिलेख और घोषणा भी बीएलओ ऐप पर दर्ज की गई।
पारदर्शिता सुनिश्चित: बिना नोटिस नहीं हटाया गया कोई नाम
विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मसौदा सूची से बिना नोटिस दिए और विधिवत आदेश पारित किए बिना किसी भी मतदाता का नाम विलोपित नहीं किया गया।
राजनीतिक दलों के साथ व्यापक समन्वय
इस अभियान के दौरान राज्य स्तर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ पांच बैठकें आयोजित की गईं। ये बैठकें 29 अक्टूबर 2025, 19 नवंबर 2025, 8 दिसंबर 2025, 6 जनवरी 2026 और 27 जनवरी 2026 को आयोजित हुईं।
इसके अतिरिक्त, जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा 904 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा 2,186 बैठकें आयोजित कर राजनीतिक दलों को प्रक्रिया से अवगत कराया गया और उनसे सहयोग प्राप्त किया गया।
राजनीतिक दलों द्वारा कुल 5,82,877 बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए गए, जिनमें भारतीय जनता पार्टी के 1,61,581, बहुजन समाज पार्टी के 1,54,224, समाजवादी पार्टी के 1,57,631, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 97,153, आम आदमी पार्टी के 6,480, सीपीआई (एम) के 315 तथा अपना दल (सोनेलाल) के 5,493 एजेंट शामिल हैं।
विशेष अभियान दिवस और जनभागीदारी
दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान चार विशेष अभियान दिवस आयोजित किए गए—11 जनवरी, 18 जनवरी, 31 जनवरी और 22 फरवरी 2026। इन दिनों बूथ स्तर पर फॉर्म-6, 6ए, 7 और 8 उपलब्ध कराए गए तथा अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण भी किया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा विभिन्न जनपदों का दौरा कर पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा, सुनवाई केंद्रों का निरीक्षण और बीएलओ के साथ संवाद कर फीडबैक प्राप्त किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।
शिकायत निस्तारण में उत्तर प्रदेश अव्वल
भारत निर्वाचन आयोग के पोर्टल और ECINET मोबाइल ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करने और ट्रैक करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अवधि में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में नागरिकों की रेटिंग के आधार पर उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
राज्य स्तर पर संचालित हेल्पलाइन (1800-180-1950) और जिला स्तर पर (1950) के माध्यम से कुल लगभग 34,000 कॉल राज्य केंद्र पर और 85,397 कॉल जिला केंद्रों पर प्राप्त हुईं, जिनका समाधान किया गया।
पीजीआरएस प्रणाली के अंतर्गत प्राप्त 431 शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया। राजनीतिक दलों से प्राप्त 107 ज्ञापनों (समाजवादी पार्टी-85, भाजपा-10, कांग्रेस-9, बसपा-1, सीपीआई(एम)-1, आम आदमी पार्टी-1) का भी पूर्ण समाधान किया गया।
अपील की व्यवस्था भी उपलब्ध
यदि कोई मतदाता निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 24(क) के तहत 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रथम अपील कर सकता है।
यदि वह निर्णय से संतुष्ट नहीं होता, तो धारा 24(ख) के अंतर्गत 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत की जा सकती है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि यह पूरा अभियान पारदर्शिता, सटीकता और व्यापक जनभागीदारी के सिद्धांतों पर आधारित रहा, जिसने उत्तर प्रदेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया है।


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