लखनऊ के रेतेश्वर महादेव धाम का 93.43 लाख रुपए धनराशि से हो रहा कायाकल्प, लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण
प्रदेश सरकार प्रदेश के प्रयासों से अल्पज्ञात आस्था स्थलों को मिल रही विशिष्ट पहचान* *मान्यता अनुसार 200 वर्ष प्राचीन है रेतेश्वर महादेव धाम, राजा दशरथ से जुड़ी है किंवदंती
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 9 Apr, 2026 06:40 PMलखनऊ, 09 अप्रैल 2026 उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग राज्य के अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी कड़ी में लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र में सई नदी के तट पर स्थित रेतेश्वर महादेव धाम में आधारभूत ढांचे के विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। करीब 93.43 लाख रुपए की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य मंदिर के पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'प्रदेश सरकार 'विकास भी, विरासत भी' की परिकल्पना को धरातल पर उतार रही है। राज्य में अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जो स्थानीय समुदायों की आस्था का केंद्र है। ये मंदिर हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार इन आस्था स्थलों के संरक्षण और उन्हें श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। रेतेश्वर महादेव धाम जैसे स्थलों के विकास के माध्यम से हम प्रदेश के आध्यात्मिक परिदृश्य को सशक्त और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं।' तीव्र गति से हो रहा कायाकल्प कार्य रेतेश्वर महादेव मंदिर परिसर के कायाकल्प की दिशा में तेजी से काम जारी है। यहां रिटेनिंग वॉल का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जबकि सुरक्षा के लिहाज से नदी किनारे प्रोटेक्टिव ग्रिल लगाई जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक शौचालय, जन सेवा केंद्र और इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने का काम भी किया जा रहा है। साथ ही मिट्टी भराई के साथ उद्यान विकास (हॉर्टिकल्चर) के जरिए पूरे परिसर को आकर्षक और व्यवस्थित स्वरूप देने की तैयारी है। 200 साल पुराना रेतेश्वर महादेव धाम राजधानी लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र में स्थित प्राचीन रेतेश्वर महादेव धाम को लेकर स्थानीय मान्यता है कि यह मंदिर करीब 200 वर्ष पुराना है। लंबे समय से आसपास के गांवों के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, मंदिर की स्थापना राजा दशरथ से जुड़ी मानी जाती है। भगवान शिव को समर्पित इस धाम में नियमित रूप से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान होते हैं, जबकि सावन माह और महाशिवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। *विरासत संवर्धन के साथ आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा' अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि 'राज्य सरकार अल्पज्ञात मंदिरों के पुनर्विकास के जरिए आध्यात्मिक पर्यटन को मजबूती दे रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई प्राचीन मंदिर पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब तक अपेक्षाकृत कम लोगों तक ही सीमित रहे हैं। ऐसे में सरकार इन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास कर उन्हें आगंतुकों के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित कर रही है। विभागीय प्रयासों का उद्देश्य स्थानीय विरासत को विशिष्ट पहचान दिलाने के साथ यहां आने वाले पर्यटकों को एक समृद्ध और यादगार अनुभव प्रदान करना भी है।'


No Previous Comments found.