चेहरा पहचान प्रणाली से आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार वितरण में बड़ी प्रगति

फरवरी में लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों तक एफआरएस से पहुंचा पुष्टाहार, डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी, फर्जीवाड़े पर रोक लगने से उचित लाभार्थियों को फायदा

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Lucknow, 17 Mar, 2026 06:35 PM
चेहरा पहचान प्रणाली से आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार वितरण में बड़ी प्रगति

लखनऊ, 17 मार्च। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार के वितरण को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लागू की गई चेहरा पहचान प्रणाली यानी एफआरएस के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। फरवरी में प्रदेश के लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों को इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के दिशा निर्देशों के तहत प्रदेश में एफआरएस प्रणाली से ही पुष्टाहार वितरण को मान्यता दी गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही एफआरएस से पुष्टाहार वितरण का शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। योगी सरकार में न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ है कि पोषण का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे1


फरवरी में 81 प्रतिशत तक पहुंचे एफआरएस लाभार्थी-


प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार के लगभग 1 करोड़ लाभार्थी हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने डिजिटल व्यवस्था को तेजी से अपनाते हुए फरवरी में करीब 81 प्रतिशत लाभार्थियों तक पुष्टाहार पहुंचाया। इस तरह फरवरी में लगभग 81 लाख लाभार्थियों को फेस रिकॉग्निशन प्रणाली के माध्यम से पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। विभाग के अनुसार यह उपलब्धि पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का संकेत है।


किशोरियों तक भी पहुंच रहा पोषण-


प्रदेश सरकार पोषण योजनाओं के दायरे को लगातार व्यापक बना रही है। इसी क्रम में आठ जनपदों में किशोरियों को भी अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान माह में भी एफआरएस प्रणाली के माध्यम से वितरण की प्रगति संतोषजनक है और उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने में लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रतिशत फरवरी की तुलना में और बेहतर होगा। डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित व्यवस्था से पोषण योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी बनता दिखाई दे रहा है।

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