सीएम फंड से जरूरतमंदों को इलाज के लिए हर साल दिए जाते हैं 1200 से 1500 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने किया गोरखपुर में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन, कहा- गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता, पहले की सरकार हर जिले में पालती थी माफिया, वर्तमान सरकार हर जिले को दे रही मेडिकल कॉलेज: सीएम योगी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 26 Jun, 2026 10:49 PMगोरखपुर, 26 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए प्रति वर्ष 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाते हैं। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा आज की आवश्यकता है। वर्ष 2017 के बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा के विस्तार से सरकार ने प्रदेश के प्रति लोगों की धारणा को बदला है। पूर्व व वर्तमान सरकार के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि पहले हर जिले में माफिया पैदा किया गया और अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज की सुविधा दी जा रही है।
सीएम योगी शुक्रवार को बेतियाहाता में एस्ट्रोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ दिया था, जबकि हमारी सरकार ने प्रदेश को ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन’ जैसी योजनाओं का उपहार दिया है। इन योजनाओं से प्रदेश के प्रति धारणा बदलने, नई और मजबूत पहचान बनाने में मदद मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र का उन्नयन सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में संपूर्ण विश्व की सबसे बड़ी स्कीम ‘आयुष्मान भारत’ संचालित हो रही है। इस स्कीम में जो तबके छूट गए, उन्हें यूपी सरकार ने राज्य स्तर पर कवर किया। इस योजना में लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मुफ्त मिलती है। इसके अलावा वह जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए प्रति वर्ष 1200 से 1500 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से देते हैं।
बीमार थी पूर्व की सरकारों की मानसिकता-
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद से प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बिना भेदभाव सबको सुरक्षा, सम्मान और शासन की सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में एकमात्र गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज था, जो खुद ही बीमार था। वास्तव में मेडिकल कॉलेज बीमार नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की मानसिकता बीमार थी, जिन्होंने यहां की जनता को मरने के लिए छोड़ दिया था। आज वही बीआरडी मेडिकल कॉलेज बेहतरीन तरीके से संचालित हो रहा है। गोरखपुर में एम्स की भी सुविधा मिल रही है। गोरखपुर के अलावा महाराजगंज, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बहराइच, आजमगढ़, गाजीपुर, रायबरेली, अमेठी, मिर्जापुर, चंदौली में मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। इन मेडिकल कॉलेज में क्लासेज के साथ हॉस्पिटल भी बेहतरीन तरीके से चल रहे हैं। बलिया में भी मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिल चुकी है।
आज सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं उपलब्ध-
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकारी अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि 2017 के पहले लखनऊ, दिल्ली, मुंबई सहित सभी बड़े शहरों में इलाज के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की लंबी कतार नजर आती थी। 2005 में गोरखपुर के जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एके गुप्ता की दुखद मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हो गई थी। तब एक भी आईसीयू बेड नहीं था। डायलिसिस की सुविधा नहीं थी, अच्छे ब्लड बैंक नहीं थे, प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं थी। आज गोरखपुर में दो दर्जन से अधिक अस्पताल ऐसे हैं, जहां आईसीयू की सुविधा है। 2007 में गोरखनाथ हॉस्पिटल में 10 बेड के साथ पहली बार आईसीयू की सुविधा शुरू हुई थी। ब्लड सेपरेटर मशीन और डायलिसिस मशीन भी पहली बार गोरखनाथ हॉस्पिटल में ही लगाई गई। आज सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं।
विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा देना बड़ी जिम्मेदारी-
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना अस्पताल और डॉक्टर की बड़ी जिम्मेदारी है। प्रयास होना चाहिए हम स्वस्थ रहें। फिर भी कभी बीमारी आ गई तो उपचार का केंद्र अच्छा होना चाहिए। उपचार के अच्छे केंद्र के रूप में आज एस्ट्रोमेडिक्स हॉस्पिटल के जरिए एक नई कड़ी जुड़ी है। यूपी में जो स्वास्थ्य क्षेत्र पहले की सरकारों में उपेक्षित था, आज लोगों ने उसमें निवेश करना प्रारंभ किया है।
गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे मार्कण्डेय चंद-
हॉस्पिटल संचालक परिवार के अभिभावक रहे पूर्व मंत्री मार्कण्डेय चंद की स्मृतियों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मंत्री गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे। वह किसी भी दल में रहे हों, पीठ के प्रति उनका गहरा लगाव व गहरी आस्था थी। करियर दांव पर लगाकर भी वह संबंधों को महत्व देते थे। सीएम ने एक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि मार्कण्डेय चंद ने बसपा सरकार में मंत्री रहते हुए भी विधानभवन में मुझे अपनी कुर्सी पर बैठने के लिए इस आशय से आग्रह किया कि उनके लिए गोरक्षपीठ सर्वोपरि है। उनके पुत्रों सीपी चंद और अरुण चंद ने एस्ट्रोमेडिक्स हॉस्पिटल के जरिये उनकी स्मृतियों को जीवंत किया है।
मार्कण्डेय चंद की प्रतिमा का अनावरण किया सीएम ने-
हॉस्पिटल के शिलापट्ट का अनावरण करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने भ्रमण कर व्यवस्थाओं व चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने परिसर में पूर्व मंत्री स्वर्गीय मार्कण्डेय चंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया और पुष्पार्चन कर उनकी स्मृतियों को नमन किया।
सीएम योगी के नेतृत्व में मिसाल बना चिकित्सा क्षेत्र: सीपी चंद-
उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए एमएलसी एवं हॉस्पिटल के अध्यक्ष सीपी चंद ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं की मिसाल पेश कर रहा है। सीएम की प्रेरणा से वह अपने पिता स्व. मार्कण्डेय चंद के स्वप्न को साकार करने के लिए इस हॉस्पिटल का प्रोजेक्ट लेकर आए हैं। इसके संचालन में गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल का भी सहयोग मिलेगा। कार्यक्रम को सांसद रविकिशन शुक्ल ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. अरुण चंद ने किया।
इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, राजेश त्रिपाठी, श्रीराम चौहान, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हॉस्पिटल की चिकित्सा निदेशक डॉ. आरती चंद, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।



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