कवि समाज को दिशा देने वाले चिंतक और प्रेरक होते हैं: मुख्यमंत्री धामी
अभिव्यंजना 5.0’ में बोले मुख्यमंत्री, उत्तराखंड की साहित्यिक परंपरा नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे रही
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 6 Jun, 2026 10:51 PMरामनगर/कालाढूंगी, 6 जून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कालाढूंगी तहसील स्थित नमस्ते कॉर्बेट रिजॉर्ट, धनपुर धमोला में आयोजित ललित फाउंडेशन के पंचम अधिवेशन ‘अभिव्यंजना 5.0’ का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कवि केवल शब्दों के निर्माता नहीं होते, बल्कि समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं। उनकी रचनाएं समाज को दर्पण दिखाने के साथ-साथ सकारात्मक परिवर्तन की दिशा भी प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और सृजनशीलता को अनुभव करने का एक अभिनव अवसर है। उन्होंने कहा कि जब समाज चुनौतियों और उलझनों से घिर जाता है, तब कवि अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जनमानस को जागृत कर स्वतंत्रता आंदोलन को गति प्रदान की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में उपस्थित कवियों की रचनाओं में प्रेम, विरह, देशभक्ति, विद्रोह, हास्य और भक्ति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने डॉ. कुमार विश्वास की विशिष्ट प्रस्तुति शैली और साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कविता को नई पहचान दिलाने का कार्य किया है। वहीं पद्मश्री अशोक चक्रधर की रचनाओं को हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों का उत्कृष्ट संगम बताया। डॉ. हरिओम पंवार की कविताओं को राष्ट्रभक्ति और जनचेतना की सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं श्रोताओं को ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन साहित्यकारों ने कविता को सीमित मंचों से निकालकर जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है तथा युवाओं को साहित्य से जोड़ने में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से साहित्य, संस्कृति और सृजन की भूमि रही है। हिमालय की गोद में बसी इस पावन धरती ने अनेक साहित्यकारों, कवियों और लोकचिंतकों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी लेखनी से समाज को दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, चंद्रकुंवर बर्त्वाल, गिर्दा, शैलेश मटियानी, गौरा पंत ‘शिवानी’ और मोहन उप्रेती जैसे साहित्यिक व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की साहित्यिक चेतना और सृजनधारा ने सदैव देश-विदेश के साहित्य प्रेमियों को हर्षित किया है। आज भी प्रदेश की साहित्यिक परंपरा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे रही है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कवियों, कवित्रियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली विचारधारा और सृजनशील सोच का सम्मान है। उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों और समाजसेवियों को शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने उपस्थित कवियों और साहित्यकारों का आह्वान करते हुए कहा कि वे साहित्य और संस्कृति की इस चेतना को नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जब प्रख्यात कवि मंच से अपनी रचनाओं का पाठ करते हैं तो वे केवल शब्द नहीं रह जाते, बल्कि जनमानस के लिए प्रेरणा और परिवर्तन का स्वर बन जाते हैं।
कार्यक्रम में कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत, कवि डॉ. कुमार विश्वास, पद्मश्री अशोक चक्रधर, डॉ. हरिओम पंवार सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनेक कवि, साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री के आईआरबी बेलपड़ाव, रामनगर पहुंचने पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने उनका स्वागत किया। स्वागत करने वालों में विधायक बंशीधर भगत, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, गणेश रावत, सुरेश भट्ट, शंकर कोरंगा, सुरेंद्र नामधारी, जेडए वारसी, मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।



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