सीएम योगी के विजन से आधुनिक बनाया जा रहा गोमती बैराज, मजबूत होगी राजधानी की पेयजल आपूर्ति
सीएम योगी के निर्देश पर जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करने के लिए शुरू हुआ गेट बदलने का कार्य, लखनऊ को निर्बाध पेयजल आपूर्ति देने के लिए उठाया कदम, स्काडा तकनीक से स्वचालित संचालन की दिशा में बढ़ा सिंचाई विभाग
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 9 May, 2026 05:13 PMलखनऊ, 9 मई: योगी सरकार द्वारा प्रदेश में बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत राजधानी स्थित गोमती बैराज को आधुनिक और आदर्श बैराज सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। सीएम योगी के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने बैराज के पुराने और क्षतिग्रस्त वर्टिकल गेटों को बदलने का कार्य शुरू कर दिया है। इससे राजधानी लखनऊ की पेयजल आपूर्ति और अधिक मजबूत होगी। इसके अलावा जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन को नई तकनीक के माध्यम से और मजबूती मिलेगी।
बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ने से कार्यक्षमता होने लगी थी प्रभावित-
प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने बताया कि वर्ष 1980 से 1983 के बीच निर्मित गोमती बैराज लंबे समय से राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। यह बैराज कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन पर 105.6 मीटर का निर्धारित जल स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे लाखों लोगों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो पाता है। इसके साथ ही बारिश के मौसम में गोमती नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित कर शहर को बाढ़ जैसी स्थितियों से बचाने में भी यह अहम योगदान देता है। उन्होंने बताया कि समय के साथ नदी के पानी की गुणवत्ता और लगातार उपयोग के कारण बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ गया था। इससे गेटों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगी थी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चरणबद्ध तरीके से गेट बदलने के निर्देश दिये थे। इसी क्रम में वर्ष 2024 में दो गेट बदले गए थे, जबकि 2025 में चार अन्य गेटों को प्रतिस्थापित किया गया। अब अंतिम चरण में शेष चार गेटों के निर्माण और स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
बरेली के आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया गेटों का निर्माण-
मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि इन गेटों का निर्माण बरेली स्थित आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया है। प्रत्येक गेट दो स्तरों में तैयार किया गया है, जिसमें ऊपरी हिस्से का वजन लगभग 16 टन और निचले हिस्से का वजन करीब 18 टन है। सभी दस गेटों की चौड़ाई 18 मीटर तथा ऊंचाई 4.95 मीटर निर्धारित की गई है। अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना वाले ये नए गेट लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे। उन्होंने बताया कि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गेट बदलने के दौरान राजधानी की पेयजल आपूर्ति को प्रभावित न होने देना था। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने बैराज के ऊपरी हिस्से में कॉफरडैम का निर्माण कराया है, ताकि मरम्मत और प्रतिस्थापन कार्य के दौरान जल स्तर को नियंत्रित रखा जा सके। इस व्यवस्था से कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन तक पर्याप्त पानी पहुंचता रहेगा और शहरवासियों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की हो रही तैयारी-
मुख्य अभियंता ने बताया कि मरम्मत और गेट प्रतिस्थापन कार्य को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए 8 मई से 15 जून तक कुल 45 दिनों की बंदी निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के कारण जल स्तर में गिरावट की संभावना को देखते हुए विभाग चौबीसों घंटे काम कर रहा है ताकि कार्य समय से पहले पूरा किया जा सके। इसके लिए इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है। बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की तैयारी की जा रही है। इससे बैराज के गेटों का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा। जल स्तर की निगरानी, गेटों का नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया जैसी व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। इससे मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और पूरी प्रणाली अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी होगी।



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