मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश

यूपी के गोरखपुर और रामपुर जिले में स्थापित हो रही ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं गोरखपुर में टोरेंट पॉवर का 0.5 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट, 9 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता रामपुर में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट, 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता

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Lucknow, 9 Mar, 2026 08:50 PM
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश
लखनऊ, 9 मार्च। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के गोरखपुर और रामपुर जनपदों में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

यूपी नेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि गोरखपुर में टोरेंट पॉवर द्वारा 0.5 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। यह पायलट प्रोजेक्ट प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के उपयोग और उसके व्यावसायिक विस्तार की संभावनाओं को परखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी तरह रामपुर जिले में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन परियोजना स्थापित की जा रही है। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता लगभग 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पानी की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। इसका उपयोग परिवहन, उद्योग और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इन जनपदों में स्थापित हो रही ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा निवेश बढ़ेगा और आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

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