'जेल इसी रास्ते जाएंगे'... आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ राजभर का अखिलेश पर हमला

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Lucknow, 27 Jun, 2026 04:01 PM
'जेल इसी रास्ते जाएंगे'... आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ राजभर का अखिलेश पर हमला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सैफई परिवार पर निशाना साधा है। इस बार उन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। राजभर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा की, जिसके साथ 'सैफई परिवार का भ्रष्टाचार पार्ट-2' लिखा हुआ एक टेम्पलेट भी शेयर किया। इससे पहले राजभर 'सैफई परिवार का भ्रष्टाचार पार्ट-1' के जरिए गोमती रिवर फ्रंट परियोजना को लेकर भी अखिलेश यादव और सैफई परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं। अब उन्होंने अपने दूसरे पोस्ट में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को निशाने पर लिया है।


'भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण है एक्सप्रेसवे'-


ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि अगर अखिलेश यादव सरकार के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण देखना हो तो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे उसका सबसे बड़ा नमूना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से पैसा कमाने की लालच में एक्सप्रेसवे का डिजाइन और रूट इस तरह तैयार किया गया कि यह लोगों की सुविधा के बजाय कुछ लोगों के निजी फायदे का माध्यम बन गया।


राजभर ने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से एक्सप्रेसवे को ऊपर-नीचे और घुमावदार बनाया गया, जिसके कारण यह हादसों के लिए बदनाम हो गया। उन्होंने दावा किया कि इस एक्सप्रेसवे पर अब तक बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है और कई परिवार बिखर गए हैं।


'मानकों की अनदेखी कर बनाया गया एक्सप्रेसवे'-


राजभर ने आरोप लगाया कि जल्द पैसा कमाने की हवस में निर्माण के दौरान गुणवत्ता और तय मानकों की अनदेखी की गई, इसी का नतीजा है कि आज भी इस एक्सप्रेसवे पर लगातार दुर्घटनाएं होती हैं और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।


'जमीन खरीद से मुआवजे तक हुई बंदरबांट'-


अपनी पोस्ट में राजभर ने आरोप लगाया कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक बड़े पैमाने पर जमीनों के सौदों में अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि पहले औने-पौने दामों पर जमीनें खरीदी गईं, फिर एक्सप्रेसवे का रूट उसी हिसाब से तय और बदला गया। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर कई जमीनों को आवासीय श्रेणी में दर्ज कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे की घोषणा के बाद भी कई रजिस्ट्रियां कराई गईं और बाद में उन्हीं जमीनों पर भारी मुआवजा लिया गया।


राजभर का दावा है कि जब एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हुआ तो सैफई परिवार और उनके करीबी लोगों की जमीनों की कीमतें कई गुना बढ़ गईं और सबसे ज्यादा फायदा उन्हें ही मिला।


'270 किलोमीटर से बढ़ाकर 300 किलोमीटर कर दिया गया'-


राजभर ने अपनी पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि निजी लाभ पहुंचाने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का रूट इस तरह मोड़ा गया कि उसकी लंबाई 270 किलोमीटर से बढ़कर 300 किलोमीटर से अधिक हो गई। उनके मुताबिक इसका नुकसान आज भी आम जनता उठा रही है। उन्होंने कहा कि लंबा रूट होने की वजह से लोगों का समय ज्यादा लगता है, ईंधन की खपत बढ़ती है और यात्रा का खर्च भी बढ़ जाता है।


'जेल भी इसी एक्सप्रेसवे से जाएंगे'-


पोस्ट के आखिर में राजभर ने कहा कि सैफई परिवार के भ्रष्टाचार का मवाद आज भी बाहर आ रहा है और आने वाले समय में सभी मामलों का हिसाब होगा। उन्होंने दावा किया कि उनके पास सैफई परिवार के भ्रष्टाचार से जुड़ा पूरा डोजियर मौजूद है और वह एक-एक कर सभी मामलों को सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि सैफई परिवार को अपने भ्रष्टाचार की सजा जरूर मिलेगी और जेल भी इसी एक्सप्रेसवे से जाना पड़ेगा।

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