उत्तराखंड: चमोली टनल हादसे में 7 की मौत, 3 की तलाश जारी... जायजा लेने टनल के भीतर पहुंचे सीएम धामी

पीपलकोटी में 15 घंटे से जारी रेस्क्यू आपरेशन, मलबे और पानी ने बढ़ाई राहत कार्य में चुनौती टनल से 14 मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया, एक गंभीर घायल श्रीनगर हायर सेंटर रेफर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ-सेना तैनात, केंद्र ने हर संभव मदद का दिया आश्वासन

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Lucknow, 14 Aug, 2026 11:53 AM
उत्तराखंड: चमोली टनल हादसे में 7 की मौत, 3 की तलाश जारी... जायजा लेने टनल के भीतर पहुंचे सीएम धामी

उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित पीपलकोटी में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार शाम एक भीषण हादसा हो गया। टनल में अचानक हुए भूधंसाव, पानी के रिसाव और मलबे के कारण 24 मजदूर फंस गए। उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित पीपलकोटी में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार शाम एक भीषण हादसा हो गया। टनल में अचानक हुए भूधंसाव, पानी के रिसाव और मलबे के कारण 24 मजदूर फंस गए। पिछले 15 घंटों से जारी व्यापक रेस्क्यू आपरेशन में अब तक 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, इस हादसे में 7 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन मजदूर अब भी टनल के अंदर फंसे हुए हैं। आज यानी शुक्रवार को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने टनल के भीतर जाकर रेस्क्यू आपरेशन का जायजा लिया और अधिकारियों को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। सीएम इसके बाद गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती घायलों से मिलने भी जाएंगे। 1.5 किमी हिस्से में हुआ भूधंसाव अधिकारियों के अनुसार, हादसा गुरुवार शाम 7 बजे मायापुर (पीपलकोटी) में हुआ। तीन किलोमीटर लंबी टीआरटी टनल के लगभग 1.50 किमी हिस्से में अचानक तेज आवाज के साथ भारी भूस्खलन हुआ और पानी का रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते टनल के अंदर कीचड़, पत्थर और पानी भर गया, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए। हादसे के तुरंत बाद टनल की बिजली गुल हो गई और आॅक्सीजन का स्तर तेजी से घटने लगा, जिससे बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य कलेक्टर गौरव कुमार खुद रेस्क्यू अभियान की निगरानी कर रहे हैं। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल के साथ एनडीआरएफ (27 जवान), एसडीआरएफ (42 जवान), डीआरएफ-फायर सर्विस की टीमें तैनात हैं। इसके अलावा गौचर और जोशीमठ से सेना और आईटीबीपी की अतिरिक्त टीमों को भी बुला लिया गया है। केंद्र से मिल रही हर संभव मदद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा-टनल में 22 से अधिक लोगों के फंसे होने की सूचना थी, जिनमें से 19 को रेस्क्यू कर लिया गया है। दुर्भाग्यवश कुछ श्रमिकों की जान गई है। टनल में अभी भी 3 लोग फंसे हैं जिन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के लिए टीमें जुटी हुई हैं। केंद्र सरकार से भी लगातार संपर्क बना हुआ है और हर संभव मदद मिल रही है। घायलों का उपचार जारी सुरक्षित निकाले गए 14 मजदूरों में से 13 का इलाज गोपेश्वर के जिला अस्पताल में चल रहा है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल श्रमिक को बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। प्रशासन की पहली प्राथमिकता टनल में फंसे अंतिम 3 मजदूरों को सकुशल बाहर निकालना है। धमाके जैसी आवाज और अचानक घुसा मलबा जिला अस्पताल गोपेश्वर में इलाज करा रहे घायलों ने हादसे की भयानक तस्वीर बयां की। छत्तीसगढ़ निवासी घायल सुनील दीवान ने बताया, हम 17 लोग टनल के अंदर सरिया से शटरिंग का काम कर रहे थे। अचानक 150 मीटर दूर तेज धमाके के साथ भारी मलबा और पानी अंदर घुस आया। धक्का इतना तेज था कि लोग दूर जा गिरे। आक्सीजन कम होने से दम घुटने लगा था, बचाओ-बचाओ की चीखें गूंज रही थीं।

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