Supreme Court Decision: धर्म बदला तो आरक्षण खत्म! आर्टिकल 341 पर कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति का दर्जा पा सकते हैं. ईसाई या किसी अन्य धर्म में कन्वर्ज़न पर SC दर्जा तुरंत खत्म हो जाएगा और SC/ST Act का लाभ नहीं मिलेगा.
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 24 Mar, 2026 01:04 PMधर्म बदलने पर क्या आरक्षण खत्म हो जाता है? अगर कोई फिर से अपने पुराने धर्म में लौटे तो क्या उसे अनुसूचित जाति का दर्जा वापस मिल सकता है? इन सवालों पर लंबे समय से बहस चल रही थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि धर्मांतरण और SC स्टेटस के लाभ दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते. कोर्ट के इस फैसले का असर सीधे लाखों लोगों पर पड़ सकता है. खासकर उन परिवारों पर, जहां धर्म और पहचान दोनों बदल रहे हैं.
Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में Andhra Pradesh High Court के 2025 के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान की आर्टिकल 341 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति Christianity या Islam जैसे अन्य धर्मों में परिवर्तित होता है, तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा (SC Status) समाप्त हो जाता है। यह फैसला मुख्य रूप से उन समुदायों पर लागू होता है जिनकी पहचान हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के सामाजिक ढांचे से जुड़ी है।
क्या कहता है Article 341? संविधान का अनुच्छेद 341 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे उन जातियों को अधिसूचित करें जिन्हें Scheduled Castes (SC) माना जाएगा। 1950 का मूल आदेश केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों को SC दर्जा देता है। बाद में साल 1956 में संशोधन कर इसमेन सिख और 1990 में संशोधन द्वार बौद्ध धर्म को शामिल किया गया। सबको लाभ तो इस्लाम-ईसाई को क्यों नहीं? अहम सवाल यह उठता है कि अनुच्छेद 341 में जब सभी धर्मावलंबियों को लाभ मिल रहा है तो इस्लाम-ईसाई वंचित क्यों? इस्लाम और ईसाई धर्म में भी विभिन्न फिरके और सेक्ट्स मौजूद हैं, तो फिर यह फैसला किस आधार पर दिया गया? क्या यह सामाजिक भेदभाव नहीं है? इस पर सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर वकील का कहना है, "उच्चतम न्यायालय ने Article 341 की व्याख्या करते हुए माना कि इन धर्मों में 'छुआछूत' जैसी सामाजिक कुरीतियां सैद्धांतिक रूप से मौजूद नहीं हैं, जो SC दर्जे का मूल आधार है। हालिया फैसला इसी सिद्धांत पर आधारित है।" आरक्षण का लाभ: धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति सरकारी नौकरियों, शिक्षा और विधायी निकायों (Elections) में SC/ST के लिए आरक्षित सीटों का लाभ उठाने का अधिकार खत्म हो जाएगा। ST स्टेटस का अंतर: ध्यान दें कि Scheduled Tribes (ST) का दर्जा अक्सर संस्कृति और जातीयता पर आधारित होता है, धर्म पर नहीं। हालांकि, SC के मामले में धर्म परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ता है। घर-वापसी (Reconversion) के मामलों में, यदि व्यक्ति वापस अपने मूल धर्म में लौटता है और समाज उसे स्वीकार कर लेता है, तो दर्जे की बहाली पर कानूनी बहस संभव है।


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