25 साल का सफर: पीएम मोदी बोले- ‘मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीता हूं’
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 7 Oct, 2026 06:24 PMनई दिल्ली, 07 अक्टूबर 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में अपने सफर और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में मिले संघर्ष, विरोध और चुनौतियों ने उन्हें लगातार सीखने का अवसर दिया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं। जीवन में क्या बनूंगा, कभी सोचा ही नहीं। जिसने गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया। जिसने मेरा विरोध किया, उसने मुझे लोकतंत्र की शक्ति समझाई। मैंने ईश्वर से मांगा की कि सीखना कभी कम न हो।” अपने 25 साल के सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज जितना पीछे मुड़कर देखता हूं, उतना कृतज्ञता का भाव ही आता है। हर घटना ने मुझे कुछ न कुछ ही सिखाया है। मुझे नम्र होना सिखाया।” उन्होंने भारत को तकनीक, खेल और उद्योग सहित हर क्षेत्र में अग्रणी बनाने पर जोर दिया। पीएम ने कहा, “हर चीज में भारत सिरमौर है। टेक्नोलॉजी, खेल, उद्योग में भारत का तिरंगा लहराए। आज पूरे विश्व में भारत के पायलट की चर्चा है। एक दिन वो भी आएगा, जब दुनिया मेड इन इंडिया प्लेन की चर्चा करेगी। ये लक्ष्य तभी पूरे होंगे, जब हम दूरदर्शी नीतियां बनाएं और परिश्रम की पराकाष्ठा करें।” प्रधानमंत्री ने युवाओं से देश के लिए पूरी क्षमता के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “अब ये समय आराम का नहीं है। ये समय सोच के साथ आगे बढ़ने का है। देश के लिए खुद को खपा देने का है। आज भारत में जितने युवा हैं, वो इतिहास से मिला बहुत बड़ा मौका है, जिसे हमें गंवाना नहीं है।” भारत के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे दिल की हर धड़कन में क्या एक ही संकल्प नहीं गूंजना चाहिए कि हमें प्राचीन भारत के गौरव को पुनर्जीवित करना है। कभी भारत विश्व की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करता था। समय का चक्र बदला, गुलामी का कालखंड आया, भारत को लूटकर तबाह कर दिया गया। जो भारत दुनिया को दिशा दिखाता था, उसके पुस्तकालय जला दिए गए। छोटे-छोटे संकट विकराल होने लगे। अकाल, कई विभीषिकाएं, लेकिन तब भी मां भारती की संतानों का साहस नहीं टूटा।” गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने शुरुआती अनुभवों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जब गुजरात पहुंचा तो प्रशासनिक व्यवस्था का ज्यादा ज्ञान नहीं था, तब सिर्फ जनशक्ति का भरोसा था। इसी विश्वास को मैंने अपना सामर्थ्य बनाया। मैंने जनता को साथ लेकर निर्णय लिए, नीतियां बनाई और इन्हें लागू किया। यही मंत्र- वी विल डू इट...जब जनता साथ हो तो परिणाम ही आते हैं। गुजरात ने करके दिखाया।” उन्होंने उस दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, “तब विकराल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं। देश का हर नागरिक नया रास्ता खोज रहा था। भारत की इकोनॉमी को लेकर दुनिया कहने लगी थी- इट्स अ गॉन केस। तब कोई ज्योत दिखती नहीं थी। निराशा में डूबे देश को आशा की जरूरत थी।” देश में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज मेड इन इंडिया फोन का जलवा है। कभी भारत में ब्लैकआउट हेडलाइन बनती थी, आज सोलर पावर के चर्चे होते हैं। आज खेती का उदाहरण भी है। आजादी के बाद खेती के बढ़ने की दर किसी दशक में रही तो 2015-25 के दशक में सबसे ज्यादा रही।” अपने काम करने के तरीके को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “मैंने वही काम किया, जो मुझे आता था। मैंने लोगों के साथ मिलकर काम किया और उनके साथ मिलकर फिर दोहराया- वी विल डू इट। अब तस्वीर बदल गई है।” उन्होंने अपने 25 वर्षों के सफर को जनता के विश्वास, सीख और निरंतर प्रयास से जोड़ते हुए देश को आगे बढ़ाने के संकल्प पर जोर दिया।



No Previous Comments found.