सुरों की सरताज आशा भोंसले नहीं रहीं, 92 की उम्र में थमी अमर आवाज

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Lucknow, 12 Apr, 2026 01:09 PM
सुरों की सरताज आशा भोंसले नहीं रहीं, 92 की उम्र में थमी अमर आवाज

मुंबई, 12 अप्रैल : नहीं रहीं हमारे बीच महान गायिका आशा भोंसले, 92 वर्ष की आयु में ली आखरी सांस। भारतीय संगीत जगत से रविवार को एक युग का अंत हो गया। दिग्गज पार्श्वगायिका आशा भोंसले ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन से फिल्म उद्योग, संगीत जगत और करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। 


आशा भोंसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उनका जन्म नाम आशा मंगेशकर था, आशा भोसले मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर परिवार को सपोर्ट करने के लिए सिंगिंग शुरू कर दी थी।


आशा भोंसले ने अपने करियर की शुरुआत 1943 में की थी। शुरुआती दौर में उन्हें संघर्ष करना पड़ा, लेकिन अपनी मेहनत, मधुर आवाज और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर उन्होंने जल्द ही अलग पहचान बना ली। उन्होंने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, मलयालम सहित 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गीत गाए। 


उनकी आवाज की सबसे बड़ी विशेषता थी उनकी विविधता। रोमांटिक गीतों से लेकर ग़ज़ल, भजन, लोकगीत, पॉप, क्लब सॉन्ग और शास्त्रीय संगीत तक, हर शैली में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। संगीतकार ओ.पी. नैयर, आर.डी. बर्मन, खय्याम और ए.आर. रहमान जैसे दिग्गजों के साथ उनकी जोड़ी बेहद सफल रही। 


आशा भोंसले के कई गीत आज भी श्रोताओं की जुबां पर हैं। ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘ये मेरा दिल’, ‘दिल चीज़ क्या है’, ‘इन आंखों की मस्ती’ और ‘रंगीला रे’ जैसे गीतों ने उन्हें अमर बना दिया। उनकी आवाज ने कई पीढ़ियों को जोड़ा और भारतीय सिनेमा को अनगिनत यादगार धुनें दीं। 


व्यक्तिगत जीवन में आशा भोंसले ने 1949 में गणपत राव भोंसले से विवाह किया था। बाद में उनका विवाह प्रसिद्ध संगीतकार राहुल देव बर्मन (आर.डी. बर्मन) से हुआ। उनके तीन बच्चे थे। परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपनी सफलता की नई मिसाल कायम की। 


सम्मानों की बात करें तो आशा भोंसले को भारतीय संगीत का सर्वोच्च गौरव माना जाता है। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण, बंग विभूषण और महाराष्ट्र भूषण जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। वे दुनिया की सबसे अधिक गीत रिकॉर्ड करने वाली गायिकाओं में भी शामिल रहीं। 


आशा भोंसले का निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग का अवसान है। उनकी आवाज हमेशा सुरों की दुनिया में जीवित रहेगी। संगीत प्रेमियों के दिलों में आशा भोंसले सदैव अमर रहेंगी।


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