पेशा हो या मिशन, कलम का ईमानदार होना पहली शर्त’: राजनाथ सिंह
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 25 Sep, 2026 08:34 PMनई दिल्ली, 25 सितंबर 2026 नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय के 80वें जन्मदिन पर ‘अस्सी के राय साहब’ पुस्तक का विमोचन करते हुए पत्रकारिता में सत्य, जिम्मेदारी और नैतिकता को सबसे महत्वपूर्ण बताया। राय के आठ दशक के सार्वजनिक और पत्रकारिता जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “उनके जीवन के ये आठ दशक एक पाठ की तरह है, जिसका हर पन्ना हमें सिखाता है कि पत्रकार होना किस तरह का जीवन व्रत है। कितना चुनौतीपूर्ण है और इस पर चलते जाना समाज और देश के लिए कितना महत्वपूर्ण है।” राजनाथ सिंह ने कहा कि राम बहादुर राय ने निष्पक्षता, निडरता, सटीकता और स्वतंत्रता जैसे बुनियादी मूल्यों का पालन किया है। उन्होंने कहा, “साथियों, उनके लिए पत्रकारिता ये कोई पेशा नहीं है, लोक सेवा का ये जरिया है। समाचार केवल सूचना नहीं, समाज की चेतना का यह दस्तावेज है।” अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए सिंह ने बताया कि शुरुआती दिनों में राय उनके मार्गदर्शक भी रहे और विद्यार्थी परिषद के दौर में उनका नेतृत्व किया। पत्रकारिता की भूमिका पर रक्षा मंत्री ने कहा, “साथियों मैं पत्रकार तो नहीं हूँ परंतु मैं समझता हूँ कि पत्रकारिता का मतलब है समाज के लिए भाषा और कलम के दम पर खड़े रहते हुए आम जन और लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदार बने रहना, उत्तरदायी बने रहना और इस काम में मनुष्यता, देश-हित और नैतिकता से कोई समझौता नहीं करना।” उन्होंने कहा कि पत्रकार जो लिखते और दिखाते हैं, उसका लोगों की धारणा और विचारों पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए इस जिम्मेदारी को लेकर सचेत रहना जरूरी है। राजनाथ सिंह ने पत्रकारिता को पेशा या मिशन मानने की बहस के बीच ईमानदारी को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा, “साथियों ज्यादातर लोग आज पेशे के तौर पर पत्रकारिता को देखते हैं, उनके लिए पत्रकारिता एक जीविका का साधन है, इसलिए कोई बुराई भी नहीं है। पेशा माने या मिशन, कलम का ईमानदार होना ही सबसे जरूरी और ये पहली शर्त भी है।” राय की पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “साथियों उनकी कलम अपनी विचारधारा के लोगों के खिलाफ भी चली और ईमानदार विरोधियों को भी सहारा देती रही।” कार्यक्रम के अंत में राजनाथ सिंह ने पत्रकारिता से जुड़े लोगों और छात्रों से ‘अस्सी के राय साहब’ पढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने प्रभात प्रकाशन से इसका पेपरबैक संस्करण लाने की अपील भी की, ताकि विद्यार्थी इसे कम कीमत में खरीद सकें और राम बहादुर राय की पत्रकारिता यात्रा से प्रेरणा ले सकें।



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